दुभाषिया

Kumar Vikram

वो दो घरों में नहीं
एक ही घर के
दो कमरों में
एक साथ रहता है
या यूँ भी कह सकते हैं
कि यदि माता व पिता
दो अलग अलग भाषाएँ हैं
तो बच्चा दुभाषिया है
या दुभाषिया होना चाहिए
वह सिरफ एक की भाषा नहीं बोल सकता
अच्छा बच्चा अच्छा दुभाषिया ही होता है
वो लफ़्ज़ों की जड़ता छोड़ सकता है
वो बर्लिन की दीवार तोड़ सकता है
हलांकि वो दोनों भाषाओं का ज्ञाता है
इसीलिए दोनों जगह उपेक्षित है
वो दोनों भाषा समझता है
इसीलिए दोनों जगह समझा नहीं जाता है
कुछ कुछ उन जासूसों की तरह
जिनकी ज़रूरत शब्दों भावों के
अंतहीन अन्धकारमय विकट गलियों से
निकलने के लिए होती तो है
पर जिनसे दोस्ती दिखाना ख़तरे से ख़ाली नहीं
बल्कि उन्हें बीच चौराहे पर ‘दो-गला’ कह
भाषा विद्रोही घोषित कर ही
खुद को निज भाषा सेवी जताया जा सकता है

Kumar Vikram