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लेबेन्स्रॉम – “रहने और विकास के लिए जगह”


Skand Shukla

बन्दर : "तुझे अब डरने की ज़रूरत नहीं उससे। उन्होंने उसे मार डाला !"
बन्दरिया : "किसने ? किसे ?"
बन्दर : "वह तेंदुआ जो इस पेड़ पर अक्सर आता था। इंसानों ने।"
बन्दरिया : "पर क्यों ?" 
बन्दर : "वह मानवों के शहर लखनऊ में घुस गया था।"
बन्दर :"मूरख कहीं का ! उसे वहाँ जाने की क्या ज़रूरत थी !"
बन्दर : "समस्या तो यही है। हममें से कोई कहीं नहीं जाता। केवल इंसान जाता है।"
बन्दरिया :"मतलब ?"
बन्दर : "हिटलर का नाम सुना है तूने ?"
बन्दरिया : "नहीं। कोई जानवर है ?"
बन्दर : "जानवर कहकर जानवरों को गाली न दे तू। वह एक इंसान था। इन्हीं की बिरादरी का।"
बन्दरिया : "उसने क्या किया।"
बन्दर : "उसने लोग मारे। साथी इंसान।"
बन्दरिया : "पर क्यों ? इंसान तो इंसान नहीं खाते !"
बन्दर : "इंसान भूख के लिए ज़्यादातर काम नहीं करता। उसे ताक़त चाहिए होती है।"
बन्दरिया : "कैसी ताक़त है यह जो मारने से मिलती है !"
बन्दर : "गुरूर की ताक़त।"
बन्दरिया : "तो क्या आदमियों को मारकर हिटलर बहुत बड़ा और मोटा हो गया ताक़त के साथ ?"
बन्दर : "नहीं। उतना ही रहा। उसे लेकिन लगा ... "
बन्दरिया ( खिन्नता की हँसी हँसते हुए ) : "उसे लगा ... उसे लगा ! इंसान को लगता बहुत है !"
बन्दर : "और होता कुछ नहीं।"
बन्दरिया : " तू मुझे उस इंसान हिटलर की कहानी बता। आगे ?"
बन्दर : "उसे लेबेन्स्रॉम चाहिए था। लेबेन्स्रॉम जानती है ?"
बन्दरिया 'न' कहते हुए गरदन हिलाती है। 
बन्दर : "रहने और विकास के लिए जगह।"
बन्दरिया : "इंसानों के पास अब भी जगह की कमी है ? पूरी धरती कब्ज़ा लेने के बाद भी ?"
बन्दर : "उन्हें लगता है। उनमें से कुछ को लगता है। उनमें से कुछ को लगता रहेगा।"
बन्दरिया : "तो उस आदमी हिटलर से हमारे इस तेंदुए का क्या ताल्लुक़ ?"
बन्दर : "क्योंकि हर आदमी में एक हिटलर होता है। जो कभी भी जाग सकता है अपने लेबेन्स्रॉम की माँग लिए।"
बन्दरिया : "जब साथ के इंसान उसने नहीं छोड़े , तो हम जैसे जानवरों की क्या बिसात।"
बन्दर : "जीवन में किसी की बिसात छोटी नहीं होती। समय-समय का फेर है।"
बन्दरिया :"कहना क्या चाहता है तू ?"
बन्दर : "देखती जा। इंसानों का यह कुनबा अचानक जाएगा इस दुनिया से।"
बन्दरिया : "अरे, पर उसके पहले संसार में न कोई तेंदुआ बचेगा और न कोई बन्दर। अपने लेबेन्स ... लेबेन्स्रॉम के लिए ये हिटलर सबका हक़ छीन लेंगे।सबको मार देंगे।"
बन्दर : "उनको उनके हिस्से की ज़मीन हमेशा कम पड़ेगी।"
बन्दरिया बन्दर को दोनों हाथों से स्पर्श करती है। 
बन्दर : "वे किसी के लिए धरती नहीं छोड़ेंगे।"
बन्दरिया उसे धीरे से हिलाने लगती है। 
बन्दर : "तेंदुआ कहीं नहीं गया था। इंसान उसके इलाक़े में आये थे।"
बन्दरिया उसे ज़ोर से झकझोरती है। 
बन्दर : " वह इंसान बनने की कोशिश के साथ लेबेन्स्रॉम तलाशने निकला था ! भूल गया कि इंसानों-सा कमीना कोई हो नहीं सकता ! उतनी नीचता दुनिया के किसी जानवर के पास नहीं !"
बन्दरिया ज़ोर से उसे बदहवासों-सी नोचने-खगोटने लगती है। 
बन्दर : "हम सब मारे जाएँगे ! मारे जाएँगे ! लेकिन आख़िर में कोई हिटलर भी नहीं रहेगा ! कोई नहीं ! कोई नहीं !" 
( कहते हुए बन्दर पेड़ से नीचे गिर जाता है। उसका पेड़ छूट गया है। तेंदुए-सी ग़लती की शुरुआत उसने भी अन्ततः कर दी है। )

Skand Shukla

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