• Home  / 
  • Vivek Umrao Glendenning
All posts in " Vivek Umrao Glendenning "
Share

पानी, भूजल व नदियों के संदर्भ में हमारी समझ : निर्मल गंगा अविरल – प्राकृतिक नियम, परस्परता व संतुलन बनाम जादू-टोना/दैवीय मिथक

Vivek “Samajik Yayavar” गंगा गंगा व गंगा की सहयोगी नदियां भारत के लगभग 11 राज्यों में बहती हैं तथा भारत के लगभग 50 करोड़ लोगों का जीवन प्रभावित करतीं हैं। गंगा में प्रतिदिन लगभग 300 करोड़ लीटर सीवर गिरता है। एक समय की पवित्र गंगा आज दुनिया की सबसे अधिक जहरीली व विदूषित नदियों में […]

Share

सफलता व उपलब्धि

मित्र : सफलता व उपलब्धि क्या है? सामाजिक यायावर : सफलता व उपलब्धि को हम ठीक से परिभाषित ही नहीं कर पाए हैं। यदि सफलता को हम ठीक से परिभाषित कर लिए होते तो हमारे समाज की दिशा ही भिन्न होती, लोगों की मानसिकता भिन्न होती, जीवन के मानदंड ही भिन्न होते। मित्र : आपकी […]

Share

संस्कृति संस्कार

जो मेरा बचपन जानते हैं उन्हें पता है कि मैं लगभग पंद्रह वर्ष की आयु तक मातृ-भक्त, पितृ-भक्त तरह का शिशु, बालक, किशोर हुआ करता था। बचपन से मेरे मन मस्तिष्क में संस्कार के नाम पर जो अनुशासन ठूंसा गया उसकी चर्चा भी करना चाहता हूं।   बचपन में यदि मेरी माता ने जमीन में गोल […]

Share

हमारे देश व समाज को के० सी० देवासेनापथि जैसे IAS अधिकारियों की बेहद जरूरत है

तमिलनाडु राज्य के एक गांव में एक आम किसान परिवार में पैदा हुए ‘के० सी० देवासेनापथि’, IAS हैं। वर्तमान में छत्तीसगढ़ राज्य में कौशल विकास प्राधिकरण के राज्य निदेशक हैं और कृषि कार्य को कौशल के रूप में स्वीकृत कराने के लिए प्रयासरत हैं। अभी हाल तक ही छत्तीसगढ़ राज्य के दंतेवाड़ा जिले में लगभग 3 […]

Share

सामाजिक परिवर्तन व नेतृत्व के मुद्दे पर शार्टकट हमेशा ही नुकसान दायी होता है जो हम प्रायोजित कर चुके होते हैं उससे लौटना या उसको लौटाना संभव नहीं होता —— भारत को किसी भी परिस्थिति में आदिवासी/दलित/शूद्र नेतृत्व व दिशा की जरूरत है

हमें विभिन्न आर्थिक, राजनैतिक व धार्मिक सत्ताओं द्वारा प्रायोजित नेतृत्वों को परिवर्तनकारी नेतृत्व के रूप में स्वीकारने की आत्मश्लाघा व प्रवंचना से बाहर आने की जरूरत है भले ही प्रायोजित नेतृत्व तात्कालिक तौर पर यह कितना भी अधिक लाभप्रद व परिवर्तनकारी दिख रहा हो। मूल बात कहने के पहले एक सच्चा घटनाक्रम सुनाना चाहता हूं। […]

Share

JNU जैसे संस्थानों की विशिष्टता विशेष अनुदानों, अनुग्रहों व संसदीय कानूनों की शक्तियों की देन है न कि अर्जित की हुई

  जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) की स्थापना करना अच्छा निर्णय था। तत्कालीन प्रधानमंत्री व भारत सरकार की दूरगामी सोच का परिणाम था। JNU की स्थापना करने की मंशा में कोई दुर्भाव नहीं था, वरन् भारत देश की बेहतरी निहित थी। JNU ने विशिष्टता अर्जित नहीं की है। JNU की स्थापना में JNU की स्थापना के […]

Share

क्या मैं अंदर आ सकती हूं, भगवन् :: आराधनास्थलों में प्रवेश के लिए महिलाओं का संघर्ष

यह अजीब संयोग है कि इन दिनों मुसलमान और हिन्दू समुदायों की महिलाओं को एक ही मुद्दे पर संघर्ष करना पड़ रहा है- आराधनास्थलों में प्रवेश के मुद्दे पर। जहां ‘भूमाता बिग्रेड‘ की महिलाएं, शनि शिगनापुर (अहमदनगर, महाराष्ट्र) मंदिर में प्रवेश का अधिकार पाने के लिए संर्घषरत हैं वहीं मुंबई में हाजी अली की दरगाह […]

Share

आस्ट्रेलिया के तस्मानिया राज्य की राजधानी होबार्ट सिटी-बस की एक लाजवाब यादगार घटना

  सन 2007 की बात है। मैं पहली बार तस्मानिया जा रहा था, मेरी जीवन साथी भी साथ थीं। हम लोग अपनी एक वैज्ञानिक मित्र के यहां रुकने वाले थे। उन्होंने तस्मानिया की राजधानी होबार्ट में घर खरीदा था और वहां के फारेस्ट विभाग में वैज्ञानिक की नौकरी करनी शुरू की थी। तस्मानिया में एक […]

Share

सतयुग की अवधारणा मिथक है जो कर्म की अवहेलना भी करती है – मित्र के साथ संवाद

मित्र : सतयुग क्या है? सामाजिक यायावर : सतयुग एक ऐसा युग है जब सब कुछ सत्य पर आधारित है, सब कुछ ठीक होता है। मानव अपनी पूर्णता व मूल्यों की उच्चतर अवस्था को जीता है। सब कुछ सत्य पर आधारित, न्यायपूर्ण व कल्याणकारी होता है। सतयुग की अवधारणा में हर युग का काल नियत है; […]

Share

भारत के मेट्रो शहर में झोलाछाप डा० मद्रासी द्वारा खूनी बवासीर का शर्तिया इलाज

सामाजिक यायावर यह लेख भारत में सत्य घटनाओं पर आधारित है। सरकारी नौकरी करने वाला एक इंजीनियर कई वर्षों से बवासीर से परेशान था। उसके किसी मित्र ने बताया कि उसी शहर में एक मद्रासी है जो बवासीर का शर्तिया इलाज करता है। इंजीनियर मद्रासी का पता लेकर पहुंचता है। पॉश एरिया में कई मंजिला […]

1 2 3 5
Page 1 of 5