All posts in " Tribhuvan "
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ऐसा था वह “रणबांकुरा”

Tribhuvanवह 65 साल का था, लेकिन आख़िरी के समय तक उसके चेहरे पर युवाओं जैसी ही आभा थी। वह भले पहले जैसा बलिष्ठ नहीं था, लेकिन किसी को कुछ ग़लत करते देखता तो अभी भी दृढ़ता से फ़टकार लगाने में कहां चूकता था। उसका रौबीला व्यक्तित्व कुछ अलग ही अंदाज़ का था। अफ़सर उससे थर-थर […]

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क्या इस माहौल के लिए सिर्फ़ संघवादी मानसिकता से जुड़े लोग ही दोषी हैं?

Tribhuvan इन दिनों जो माहौल चल रहा है, उसे लेकर देश का एक बड़ा वर्ग आरएसएस और उससे जुड़े लोगों को दोषी मानता है। यह स्वर छुपा हुआ नहीं है। यह बहुत मुखर स्वर है और ख़ासकर वामपंथी झुकाव वाले प्रगतिशील खेमे के बुद्धजीवियों में। लेकिन क्या सिर्फ़ संघवादी मानसिकता के लोग ही इस वातावरण […]

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सभ्यता अगर ताजमहल है तो औरंगजे़ब भी ठीक वही सोचता था, जो योगी आदित्यनाथ साेचते हैं

Tribhuvan आप या मैं जिस समय अपने देश, अपने धर्म, अपने राष्ट्र और अपनी दुनिया के अतीत में झांकते हैं और उसके अंधेरे से ही प्रेम करते हैं तो यह उम्मीद करना बेकार है कि आप या मैं वर्तमान के वातायन से झरती आलोक रश्मियों को अपनी मुटि्ठयों में भरना चाहेंगे। यह आपकी या मेरी […]

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कोरी राष्ट्रपति, घांची प्रधानमंत्री…हिन्दुत्ववादियों के सामाजिक न्याय का नया मॉडल और कांग्रेसी-कम्युनिस्टों-समाजवादियों से लेकर ब्राह्मणवादियों तक के समवेत रुदन का समय

रामनाथ कोविंद देश के राष्ट्रपति हो गए हैं। वे अनुसूचित जाति से होने के कारण राष्ट्रपति बनाए गए हैं। जिस देश में ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य सर्वोच्च जातियां मानी जाती हों और इन जातियों के बड़ी तादाद में लोगों के भीतर जातिगत श्रेष्ठता का झूठा और अमानवीय अहंकार भरा हो, उस देश में यह एक […]

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हत्यारा किसान, दयालु चोर और क्रांतिकारी शासक!

[themify_hr color=”red”] चंपूद्वीप के गर्तखंड में एक किसान के खेत में कुछ लोग घुस आए। वे गन्ने तोड़ने लगे। सरसों उजाड़ने लगे और गाजरें नष्ट करने लगे। किसान ने ऐतराज किया तो वे नहीं माने। किसान ने आव देखा न ताव, हल्ला मचाना शुरू कर दिया। मारो-मारो-चोरों को मारो। किसान की आवाज़ सुनकर आसपास के […]

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गोलियां भी हमारी हैं और सीने भी। रक्त भी हमारा है और माटी भी हमारी!

Tribhuvan [themify_hr color=”red”]   देश में हिंसक और बेकाबू होते आंदोलनों को नियंत्रित करने में पुलिस के अफ़सर क्यों विफल हो रहे हैं? क्यों अपने ही लोगों पर अपने ही लोगों को गोलियां चलानी पड़ती हैं? ऐसा क्या है कि नारेबाजी या प्रदर्शन करते लोगों पर आम लोगों के वही बेटे अपने ही लोगों पर […]

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जय जवान – जय किसान :: सत्ता की दुकान

Tribhuvan [themify_hr color=”red”] आप किसानों को पुलिस की गोलियों से मरवा दो। आप जवानों को आतंकवादियों की गोलियों से मरने को मजबूर कर दो। आप जय जवान और जय किसान के नारे लगाते रहो। आप साठ हजार और सत्तर हजार करोड़ रुपए के युद्धक विमान खरीदते रहो और जवानों को यों ही मरने उनके हालात […]

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यह दुनिया ग़ज़ब है भाई

[themify_hr color=”red”] लालू यादव का भक्त कबीला इन दिनों नीतीशकुमार की क्या ग़ज़ब ख़बर ले रहा है। जैसे नीतीशकुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भोज पर जाकर और सोनिया गांधी के भोज पर न जाकर मानो ऐसा कर दिया हो कि वे अभी गंगाजी जाने वाले थे, लेकिन अचानक से धर्म बदलकर मक्का चल दिए […]

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मेरे शहर के हिस्ट्रीशीटर

[themify_hr color=”red”] उन दिनों एसपी हुआ करते थे बीजू जॉर्ज जोसेफ़। क्या हिम्मती बंदा था। खूब पढ़ाकू और खूब लड़ाकू। थानेदार थर-थर कांपते थे और बंदे को देखो तो हर समय पसीने से लथपथ। एसपी जैसा एसपी। मज़ाल कि कानून और व्यवस्था को कोई धता बता दे। थानेदार भले ढीले पड़ जाएं, सीआई चाहे कहीं […]

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