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All posts in " Nomad Hermitage "
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हमारे देश व समाज को के० सी० देवासेनापथि जैसे IAS अधिकारियों की बेहद जरूरत है

तमिलनाडु राज्य के एक गांव में एक आम किसान परिवार में पैदा हुए ‘के० सी० देवासेनापथि’, IAS हैं। वर्तमान में छत्तीसगढ़ राज्य में कौशल विकास प्राधिकरण के राज्य निदेशक हैं और कृषि कार्य को कौशल के रूप में स्वीकृत कराने के लिए प्रयासरत हैं। अभी हाल तक ही छत्तीसगढ़ राज्य के दंतेवाड़ा जिले में लगभग 3 […]

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सामाजिक परिवर्तन व नेतृत्व के मुद्दे पर शार्टकट हमेशा ही नुकसान दायी होता है जो हम प्रायोजित कर चुके होते हैं उससे लौटना या उसको लौटाना संभव नहीं होता —— भारत को किसी भी परिस्थिति में आदिवासी/दलित/शूद्र नेतृत्व व दिशा की जरूरत है

हमें विभिन्न आर्थिक, राजनैतिक व धार्मिक सत्ताओं द्वारा प्रायोजित नेतृत्वों को परिवर्तनकारी नेतृत्व के रूप में स्वीकारने की आत्मश्लाघा व प्रवंचना से बाहर आने की जरूरत है भले ही प्रायोजित नेतृत्व तात्कालिक तौर पर यह कितना भी अधिक लाभप्रद व परिवर्तनकारी दिख रहा हो। मूल बात कहने के पहले एक सच्चा घटनाक्रम सुनाना चाहता हूं। […]

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JNU जैसे संस्थानों की विशिष्टता विशेष अनुदानों, अनुग्रहों व संसदीय कानूनों की शक्तियों की देन है न कि अर्जित की हुई

  जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) की स्थापना करना अच्छा निर्णय था। तत्कालीन प्रधानमंत्री व भारत सरकार की दूरगामी सोच का परिणाम था। JNU की स्थापना करने की मंशा में कोई दुर्भाव नहीं था, वरन् भारत देश की बेहतरी निहित थी। JNU ने विशिष्टता अर्जित नहीं की है। JNU की स्थापना में JNU की स्थापना के […]

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क्या मैं अंदर आ सकती हूं, भगवन् :: आराधनास्थलों में प्रवेश के लिए महिलाओं का संघर्ष

यह अजीब संयोग है कि इन दिनों मुसलमान और हिन्दू समुदायों की महिलाओं को एक ही मुद्दे पर संघर्ष करना पड़ रहा है- आराधनास्थलों में प्रवेश के मुद्दे पर। जहां ‘भूमाता बिग्रेड‘ की महिलाएं, शनि शिगनापुर (अहमदनगर, महाराष्ट्र) मंदिर में प्रवेश का अधिकार पाने के लिए संर्घषरत हैं वहीं मुंबई में हाजी अली की दरगाह […]

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आस्ट्रेलिया के तस्मानिया राज्य की राजधानी होबार्ट सिटी-बस की एक लाजवाब यादगार घटना

  सन 2007 की बात है। मैं पहली बार तस्मानिया जा रहा था, मेरी जीवन साथी भी साथ थीं। हम लोग अपनी एक वैज्ञानिक मित्र के यहां रुकने वाले थे। उन्होंने तस्मानिया की राजधानी होबार्ट में घर खरीदा था और वहां के फारेस्ट विभाग में वैज्ञानिक की नौकरी करनी शुरू की थी। तस्मानिया में एक […]

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सतयुग की अवधारणा मिथक है जो कर्म की अवहेलना भी करती है – मित्र के साथ संवाद

मित्र : सतयुग क्या है? सामाजिक यायावर : सतयुग एक ऐसा युग है जब सब कुछ सत्य पर आधारित है, सब कुछ ठीक होता है। मानव अपनी पूर्णता व मूल्यों की उच्चतर अवस्था को जीता है। सब कुछ सत्य पर आधारित, न्यायपूर्ण व कल्याणकारी होता है। सतयुग की अवधारणा में हर युग का काल नियत है; […]

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भारत के मेट्रो शहर में झोलाछाप डा० मद्रासी द्वारा खूनी बवासीर का शर्तिया इलाज

सामाजिक यायावर यह लेख भारत में सत्य घटनाओं पर आधारित है। सरकारी नौकरी करने वाला एक इंजीनियर कई वर्षों से बवासीर से परेशान था। उसके किसी मित्र ने बताया कि उसी शहर में एक मद्रासी है जो बवासीर का शर्तिया इलाज करता है। इंजीनियर मद्रासी का पता लेकर पहुंचता है। पॉश एरिया में कई मंजिला […]

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धार्मिक कथाएं व ग्रंथ, इतिहास व इतिहासकार

किसी भी धर्म की अधिकतर पौराणिक कथायें, उस धर्म के लोगों को स्थायी रूप से मानसिक गुलाम रूपी अनुगामी बनाने के लिए लिखी गईं हैं। ताकि धर्मों की अमानवीयता, ऋणात्मकता व शोषण वाले गहरे तत्वों पर कभी सवाल न खड़ा हो पाए।   यही कारण है कि पौराणिक कथायें, कथाओं में सत्य तथ्यों के अस्तित्व […]

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समाजवादी बिल्लियों का बड़ा परिवार और फ्रैंक हुजूर

सामाजिक यायावर जो गांवों के हैं उन्होंने अपने गावों में या अपने घरों में घरेलू बिल्लियां देखी होगीं। भारत में पाई जाने वाली घरेलू बिल्ली धारीदार व छीटदार खूबसूरत होती है। अपनी दादी, नानी, माता, बुआ, मौसी, बहन व पत्नी आदि को खाने का सामान बिल्लियों से बचाने की जुगत के साथ रखते देखा होगा। […]

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प्रतिक्रिया के कारण हो रही सामाजिक चेतनशीलता के लिए भाजपा, सहयोगी संगठन व भक्तगण धन्यवाद के पात्र हैं

सामाजिक यायावर समाज में बने बनाए ढर्रों, मान्यताओं, परंपराओं, धारणाओं आदि पर सवाल उठना किसी न किसी कारक के कारण शुरू होता है। उत्प्रेरक कारक न होने पर सड़ांध के स्तर का होने के बावजूद ढर्रे, मान्यताएं, धारणाएं आदि ढोई जाती रहतीं हैं। 2014 में भाजपा की केंद्र सरकार आने के बाद भाजपा, सहयोगी संगठनों […]

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