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All posts in " Nishant Rana "
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धरती और इंसान

Nishant Rana जला देना हर एक उस पेड़ को जो तुम्हारे कहने से मनचाहा फल न दे। भाप बना कर उड़ा देना हर वो नदी जो तुम्हारे कहने पर दिशा न बदले। भून देना हर एक उस पंछी को , पशु को  जो तुम्हारे तलुए न चाटे, जो दुम हिला के हाजिर न हो तुम्हारी […]

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किसानों की जमीन पूंजीपतियों द्वारा जबर्दस्ती छीनी जाती है या हम किसान को मजबूर कर देते है ऐसा करने पर

Nishant Rana आए दिन हम सुनते रहते है की कोर्पोरेट किसानों की जमीन हथियाती जा रही है इसके आगे भी यह सुनते है कि  सरकार जोर जबर्दस्ती पूंजीपतियों को किसान की जमीनों पर कब्जा दिलवा रही है। इसके लिए हम दूर दराज के क्षेत्र, जंगलों आदि के बारे में की-बोर्ड पर बैठे तुक्के मारते रहते […]

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सामूहिक नेतृत्व बनाम गरियाने की आजादी

Nishant Rana हमें अपने खांचे इतने पसंद है कि जो हमारे खांचों में फिट बैठता है बस वहीं भगवान का दूसरा रूप है जो हमारे खांचों से अलग है उसे केवल इसलिए गालियां देंगे की हमारे खांचे वाला ऊपर दिखाई दे। आजादी के समय सबका योगदान था भगत सिंह, आजाद , गांधी , अम्बेडकर , […]

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किसान और अर्थव्यवस्था

वह भी समय ही था जब स्कूल-कॉलेज नहीं थे, बैंक नहीं थे, थे भी तो किसान की पहुंच से दूर थे।बिना स्कूल जाए लोग खेती किसानी करना सीखें, मौसम के हिसाब से फसलों का चुनाव करना सीखें, एक दूसरे की सहायता की, समूह बनाए जितना प्रकृति से लिया उसे बढ़ा कर ही लौटाया। बच्चों का […]

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बूचड़खाने –

25-30  साल पहले तक तो किसानों के लिए पशु-पालन कोई मुश्किल काम न था , पशुओं के लिए बड़े चारागाह छोड़े जाते थे, उसी में तालाब भी खुदवाएं जाते थे। पशु चरते, तालाब कीचड़ आदि में आराम फरमाते। दुधारू पशु समय पर अपने खूंटे तक भी पहुँचना समझते थे। किसान ने बाजारों से दूरी बनाई […]

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अपने लिए ही हिंसा के जाल बुनते हुए हम

आज जिस समाज में हम खड़े है हमारे चारों तरफ भय और हिंसा का माहौल है , किसी भी कीमत पर एक दूसरे को पीछे धकेल कर आगे बढ़ने ही होड़ मची है . हजारों सालों में हिंसा को इतना सूक्ष्म किया है की हमारा दैनिक जीवन जाने अंजाने  बिना किसी का भोग किये , […]

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सामाजिक नेतृत्व और अवतार

उत्तर प्रदेश की राजनीति में पांच पार्टियां मुख्य है कांग्रेस, भाजपा, सपा ,बसपा और लोकदल। पिछले कई सालों से सपा और बसपा ने ही प्रदेश की  राजनीति में मुख्य धमक रखी, पिछले लोकसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा भी राजनैतिक सत्तात्मक लड़ाई में दोबारा दावेदारी ठोक चुकी। लोकदल व कांग्रेस प्रदेश की राजनीति में अस्तित्व […]