All posts in "सामाजिक यायावर"
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भारत के विकसित, समृद्ध व वास्तविक विश्वगुरू होने की कुंजी भारत की ग्रामीण कृषक महिला है

Vivek Umrao Glendenning हम MBA की पढ़ाई करके, इंजीनियरी की पढ़ाई करके, व्यापार करते हुए भले ही व्यापार में हम किसी दुकान में बैठकर चूरन की पुड़िया ही बेचते हों, अर्थशास्त्र पढ़ते या पढ़ाते हुए इत्यादि इत्यादि करते हुए व्यापार, आय, लाभ हानि, श्रम, उत्पादन, सर्विस सेक्टर, लागत इत्यादि की बहुत चर्चाएं करते हैं, गुणा […]

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खानपान, किवदंतियां, खानपान का मनोविज्ञान व हमारा शरीर

Vivek Umrao Glendenningदुनिया की कोई जलवायु हो, मानव शरीर के लिए जो आवश्यक तत्व हैं वे समान ही रहते हैं। प्रकृति ने जलवायु के आधार पर अनाज, फल इत्यादि बनाए हैं आदमी को नहीं बनाया। दुनिया का आदमी समान है। तभी आदमी किसी भी महाद्वीप, उपमहाद्वीप, देश, राज्य, जिला, गांव में जाकर रह सकता है। […]

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Video: आदि का स्लाइडर से अपने आप नीचे फिसलना व उल्टा चढ़ना

लगभग साढ़े सात महीने की आयु में पहली बार दो कदम अपने आप चले। आठवें महीने में दोनों हाथों की मेरी उंगलियां पकड़ कर चलने लगे। दसवें महीने में सिर्फ एक उंगली पकड़ कर चलने लगे। एक-एक दिन में कई-कई किलोमीटर चल जाते। आदि बिना किसी ट्रेनिंग के एक झटके में सीढ़ियां चढ़ना शुरू किए, एक […]

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Video: जोखिम उठाने वाला “आदि”

आदि को ज्यों ही यह अनुमान लग जाता है कि वह ऐसा कर सकते हैं, तब वे बिना डरे वैसा कर गुजरने की इच्छाशक्ति रखते हैं। पार्क में खेलने आते समय उन्होंने कई बार देखा कि सात-आठ वर्ष के बच्चे लकड़ी के इन लाग्स के ऊपर संतुलन बनाते हुए चलते हैं। आदि की इच्छा रहती […]

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Video: पढ़ाकू आदि

ज्यों ज्यों आदि बढ़े होते जा रहे हैं उनकी रुचि किताबों में बढ़ती जा रही है। अपना काफी समय किताबों के साथ गुजारते हैं, वह भी आपके बिना अपने हिसाब से। आदि अब हर समय आपके साथ रहना नहीं चाहते हैं, आपको आपकी जगह छोड़कर अपने पसंदीदा कोनों में जाकर अपनी किताबों के साथ समय […]

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आदि व टोस्ट – अपना काम खुद करने का गर्व

आदि की टोस्ट खाने की इच्छा थी। आदि के लिए टोस्ट का छोटा सा डिब्बा किचन बेंच पर रखा रहता है। जब उनको खाने की इच्छा हो वह मांग सकते हैं या खुद अपने सीढ़ीदार स्टूल पर चढ़कर हाथ बढ़ा कर ले सकते हैं। शायद आदि की टोस्ट खाने की इच्छा रही होगी, इसीलिए आदि […]

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इवांका मसले से निकली बात : मोदीजी बनाम हमारी सैडिस्टिक-सोच

मोदीजी व सेल्फी लगभग पांच वर्ष पहले हमारी मित्र सूची में एक मुस्लिम तथाकथित पत्रकार हुआ करते थे। बहुत लोग इनकी पोस्टें साझा करते रहते हैं, हमको भी इनकी पोस्टें लटक-लुटक कर मिलती रहतीं हैं जबकि इनकी पोस्टों को देखकर ही हमको इनकी सैडिस्टिक सोच से मितली आती है। इन महाशय की शान में कसीदे […]

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Video: आदि, किताबें व आदि का अपना पुस्तकालय

लगभग एक मिनट के इस वीडियो में  आपको आदि के चेहरे व व्यवहार के कई आयाम दिखाई देंगे। यह वीडियो आपको आनंद देगा यह मेरा विश्वास है। कैसे आदि अपनी पसंद की किताब लाने के लिए आपकी बताई किताब का नाम मटेर देते हैं। कैसे उनकी पसंद की किताब बताने पर खुशी मन से किताब […]

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मेरे जीवन को बचाने वाले रमाशंकर पाण्डे की कहानी

Vivek Umrao Glendenning प्रस्तावना परिचय यह उस समय की बात है जब मेरे माता-पिता ने मुझे दिल व घर से बेदखल कर दिया था। मुझे कुछ ही घंटों की नोटिश पर माता-पिता के घर से अपना सामान लेकर निकलना पड़ा था। मेरी जेब में सिर्फ 200 (दो सौ) रुपए थे। उस समय मेरे पास मोबाइल […]

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राष्ट्रवाद बनाम लोकवाद बनाम निजता

Vivek Umrao Glendenning लोक से राष्ट्र होता है। राष्ट्र से लोक नहीं। बिना लोक के राष्ट्र संभव ही नहीं। लोक ही राष्ट्र का निर्माता है। जैसा लोक वैसा राष्ट्र। यदि लोक लोकतांत्रिक मूल्यों को जीता है तो राष्ट्र में भले ही राजा हो लेकिन राष्ट्र का मूल चरित्र लोकतांत्रिक होता है। यदि लोक लोकतांत्रिक मूल्यों […]

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