All posts in "आपके आलेख"
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छमिया

Mukesh Kumar Sinha”छमिया” ही तो कहते हैंमोहल्ले से निकलने वालेसड़क पर, जो ढाबा हैवहाँ पर चाय सुड़कतेनिठल्ले छोरे !जब भी वो निकलती हैजाती है सड़क के पारबरतन माँजनेकेदार बाबू के घर !!Mukesh Kumar Sinhaएक नवयुवती होने के नातेहिलती है उसकी कमरकभी कभी खिसकी होती हैउसकी फटी हुई चोलीदिख ही जाता है जिस्मजब होती है छोरों […]

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नारी तू न हुई नारायणी

Dr. Anita Chauhanहम समाज से कुरीतियां एवं बुराइयां खत्म करने का उपदेश तो बहुत जोर-शोर से देते हैं लेकिन खुद हम भी उन्हीं बुराइयों का हिस्सा हैं कभी जानबूझकर तो भी अनजाने में। समाज की हर एक बुराई एक-दूसरे से जुड़ी है। जैसे कि दहेज मूल कारण है, भू्रण हत्या का जब किसी के पास […]

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ऐसा था वह “रणबांकुरा”

Tribhuvanवह 65 साल का था, लेकिन आख़िरी के समय तक उसके चेहरे पर युवाओं जैसी ही आभा थी। वह भले पहले जैसा बलिष्ठ नहीं था, लेकिन किसी को कुछ ग़लत करते देखता तो अभी भी दृढ़ता से फ़टकार लगाने में कहां चूकता था। उसका रौबीला व्यक्तित्व कुछ अलग ही अंदाज़ का था। अफ़सर उससे थर-थर […]

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आचार्य कौटिल्य की विषकन्या

Rajeshwar Vashisthaबहुत पुरानी कहानी हैकहते हैं मेरे जनक थे आचार्य चाणक्यअर्थशास्त्र में उन्होंने मेरी संकल्पना कीताकि सुरक्षित रहे मौर्य साम्राज्यइतना कुटिल था उनका मस्तिष्ककि इतिहास उन्हें जानता हैकौटिल्य के नाम से!John Lilith Painting -1887मुझे नहीं मालूमविवाह किया या नहींउस कुरूप ब्राह्मण नेपर इतना कह सकती हूँअवश्य ही मर गई होगीउसकी माताउसे जन्म देने के तुरंत […]

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माँ

Sarita Bharatमाँ तुझमें अपना अक्स देखती हूँ  सम्पूर्ण एहसास के साथ उतर जाती हूँ तुम्हारे भीतर, अपनी पदचाप की रफ्तार पर सोचती हूँ लोहे की कोख से लोहा जन्मा था बचपन में मरमरी सी देह पर तेल मालिश करती हाथों का स्पर्श महसूसती हूँ!Sarita Bharatतुम्हारे सीने के दूध की सुगंध आज भी मेरे नथुनों में भर जाती है!पालक […]

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स्त्री यौनिकता को राष्ट्रवाद या आदर्श समाज की कल्पना से जोड़ने के कारक एवं प्रभाव

Sanjay Sharman Jothe स्त्री यौनिकता पर सत्र था, मौक़ा था यूरोप, एशिया और अफ्रीका में परिवार व्यवस्था में आ रहे बदलाव पर एक कार्यशाला. यूरोप, खासकर सेन्ट्रल यूरोप में परिवार में बढ़ते आजादी के सेन्स और महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता के बीच एक सीधा संबंध है – डेवेलपमेंट स्टडीज, मनोविज्ञान और सोशियोलोजी ने यह स्थापित […]

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पदार्थवादी मानसिकता से जूझता युवा एवं उसकी समस्याएं

Ramanand Sharma आज की युगल जोड़ी एक बहुत बड़ी संक्रामक बीमारी से जूझ रही है , वह कुछ इस प्रकार है की आज के समय में नव युवक/युवती  स्वयं को तब तक अधूरा  समझते  है जब तक लड़का  किसी लड़की के साथ प्रेम  संबंध में नहीं आ जाता है या लड़की किसी लड़के के साथ […]

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भारतीय राजनीति का मायालोक

Sanjiv Kumar Sharma भारत की जनता मायालोक, जादू और तिलिस्म में हमेशा से दिलचस्पी रखती है| एक चमत्कारिक अंगूठी से सारी मुसीबतें दूर हो जाती हैं, एक सुपर फ़ूड एकदम स्वस्थ कर देता है और हठ योग की एक मुद्रा कैंसर ठीक कर देती है| घर को स्वच्छ व पवित्र करने के लिए भी कोई […]

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क्या इस माहौल के लिए सिर्फ़ संघवादी मानसिकता से जुड़े लोग ही दोषी हैं?

Tribhuvan इन दिनों जो माहौल चल रहा है, उसे लेकर देश का एक बड़ा वर्ग आरएसएस और उससे जुड़े लोगों को दोषी मानता है। यह स्वर छुपा हुआ नहीं है। यह बहुत मुखर स्वर है और ख़ासकर वामपंथी झुकाव वाले प्रगतिशील खेमे के बुद्धजीवियों में। लेकिन क्या सिर्फ़ संघवादी मानसिकता के लोग ही इस वातावरण […]

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सीखने की कला के बिना स्कूली शिक्षा के दुष्परिणाम

Sachin Raj Singh Chauhan विश्व विकास रिपोर्ट 2018 के अनुसार स्कूलिंग विदाउट लर्निंग ने न केवल विकास के अवसरों को बर्बाद कर दिया है बल्कि वैश्विक स्तर पर बच्चों के प्रति घोर अन्याय किया है। इसके दूरगामी परिणाम देखने को मिलने लगे है। अकेले ग्रामीण भारत में विद्यालयों के तीसरी कक्षा के 75 प्रतिशत छात्रों […]

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