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भारतीय जाति-व्यवस्था ‘श्रमशीलता’ को तिरस्कृत करने वाली सामाजिक-दासत्व व्यवस्था है

Vivek “सामाजिक यायावर” भारतीय जाति-व्यवस्था कर्म आधारित व्यवस्था न होकर, श्रम को तिरस्कृत मानने वाली सामाजिक दासत्व को स्थापित करने वाली व्यवस्था थी। दरअसल जाति-व्यवस्था कर्म आधारित वर्ण व्यवस्था हो ही नहीं सकती थी। वास्तव में जाति-व्यवस्था समाज की जड़ता, कुंठा, भ्रष्टाचार, भीड़तंत्र, सामाजिक दासत्व व श्रमशीलता को तिरस्कृत करने की मानसिकता का आधारभूत पोषक तत्व […]

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छमिया

Mukesh Kumar Sinha”छमिया” ही तो कहते हैंमोहल्ले से निकलने वालेसड़क पर, जो ढाबा हैवहाँ पर चाय सुड़कतेनिठल्ले छोरे !जब भी वो निकलती हैजाती है सड़क के पारबरतन माँजनेकेदार बाबू के घर !!Mukesh Kumar Sinhaएक नवयुवती होने के नातेहिलती है उसकी कमरकभी कभी खिसकी होती हैउसकी फटी हुई चोलीदिख ही जाता है जिस्मजब होती है छोरों […]

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नारी तू न हुई नारायणी

Dr. Anita Chauhanहम समाज से कुरीतियां एवं बुराइयां खत्म करने का उपदेश तो बहुत जोर-शोर से देते हैं लेकिन खुद हम भी उन्हीं बुराइयों का हिस्सा हैं कभी जानबूझकर तो भी अनजाने में। समाज की हर एक बुराई एक-दूसरे से जुड़ी है। जैसे कि दहेज मूल कारण है, भू्रण हत्या का जब किसी के पास […]

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पौराणिक मनगढ़ंत दैवीय कथाएं व वैदिक-काल की तथाकथित महानता बनाम मनुष्य की कर्मशीलता

पुस्तक “मानसिक, सामाजिक, आर्थिक स्वराज्य की ओर” सेलेखक- “सामाजिक यायावर”हर सभ्यता व धर्म की अपनी पौराणिक कथायें होती हैं, जो काल्पनिक होती हैं। सभ्यता के लोग काल्पनिक कहानियों को सच मानकर अपनी सभ्यता की गति अवरुद्ध कर देते हैं कभी-कभी तो गति का यह ठहराव उन लोगों को हिंसक तक बना बना देता है। किसी […]

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ऐसा था वह “रणबांकुरा”

Tribhuvanवह 65 साल का था, लेकिन आख़िरी के समय तक उसके चेहरे पर युवाओं जैसी ही आभा थी। वह भले पहले जैसा बलिष्ठ नहीं था, लेकिन किसी को कुछ ग़लत करते देखता तो अभी भी दृढ़ता से फ़टकार लगाने में कहां चूकता था। उसका रौबीला व्यक्तित्व कुछ अलग ही अंदाज़ का था। अफ़सर उससे थर-थर […]

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इंट्रेप्रेन्योर बनना आसान नहीं होता – कपिल चौधरी : किसान के बेटे ने इंजीनियरिंग के बाद इंट्रप्रेन्योरशिप को चुना

Vivek “सामाजिक यायावर”इंट्रेप्रेन्योर बनना आसान नहीं होता। काम शुरू करने के पहले बहुत योजनाएं बनानी पड़तीं हैं, बहुत सारी तैयारियां करनी पड़तीं हैं, रिस्क लेने पड़ते हैं। भारतीय समाज में इन सबके अतिरिक्त सबसे बड़ा काम जो करना पड़ता है जिसमें पुरखे याद आ जाते हैं वह यह कि माता-पिता व परिवार को तैयार कैसे […]

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लहसुन व जुकीनी के सिरका वाले अचार बनाने की घरेलू विधि

Vivek “सामाजिक यायावर” आज हमने सेब से बने सिरका में लहसुन व जुकीनी के अचार रख दिए। यहां सिडनी में भारतीय दुकानों से खरीदे गए तेल से बनाए गए अचारों के जारों को धो कर, सुखाकर अपने द्वारा बनाए गए सिरका के अचारों में प्रयोग कर लिया। थोड़ा देशी पुट भी हो गया। लहसुन का […]

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आचार्य कौटिल्य की विषकन्या

Rajeshwar Vashisthaबहुत पुरानी कहानी हैकहते हैं मेरे जनक थे आचार्य चाणक्यअर्थशास्त्र में उन्होंने मेरी संकल्पना कीताकि सुरक्षित रहे मौर्य साम्राज्यइतना कुटिल था उनका मस्तिष्ककि इतिहास उन्हें जानता हैकौटिल्य के नाम से!John Lilith Painting -1887मुझे नहीं मालूमविवाह किया या नहींउस कुरूप ब्राह्मण नेपर इतना कह सकती हूँअवश्य ही मर गई होगीउसकी माताउसे जन्म देने के तुरंत […]

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माँ

Sarita Bharatमाँ तुझमें अपना अक्स देखती हूँ  सम्पूर्ण एहसास के साथ उतर जाती हूँ तुम्हारे भीतर, अपनी पदचाप की रफ्तार पर सोचती हूँ लोहे की कोख से लोहा जन्मा था बचपन में मरमरी सी देह पर तेल मालिश करती हाथों का स्पर्श महसूसती हूँ!Sarita Bharatतुम्हारे सीने के दूध की सुगंध आज भी मेरे नथुनों में भर जाती है!पालक […]

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स्त्री यौनिकता को राष्ट्रवाद या आदर्श समाज की कल्पना से जोड़ने के कारक एवं प्रभाव

Sanjay Sharman Jothe स्त्री यौनिकता पर सत्र था, मौक़ा था यूरोप, एशिया और अफ्रीका में परिवार व्यवस्था में आ रहे बदलाव पर एक कार्यशाला. यूरोप, खासकर सेन्ट्रल यूरोप में परिवार में बढ़ते आजादी के सेन्स और महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता के बीच एक सीधा संबंध है – डेवेलपमेंट स्टडीज, मनोविज्ञान और सोशियोलोजी ने यह स्थापित […]

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