आचार्य कौटिल्य की विषकन्या

Rajeshwar Vashistha

बहुत पुरानी कहानी है
कहते हैं मेरे जनक थे आचार्य चाणक्य
अर्थशास्त्र में उन्होंने मेरी संकल्पना की
ताकि सुरक्षित रहे मौर्य साम्राज्य
इतना कुटिल था उनका मस्तिष्क
कि इतिहास उन्हें जानता है
कौटिल्य के नाम से!

John Lilith Painting -1887

मुझे नहीं मालूम
विवाह किया या नहीं
उस कुरूप ब्राह्मण ने
पर इतना कह सकती हूँ
अवश्य ही मर गई होगी
उसकी माता
उसे जन्म देने के तुरंत बाद
अन्यथा कोई
इतना स्त्री द्वेषी क्यों होता?

कहते हैं, लिखा है कल्किपुराण में
चित्रग्रीव गंधर्व की पत्नी सुलोचना
सप्रयोजन देखती थी
जिस भी पुरुष की आँखों में
तुरंत मर जाता था वह!

चाणक्य के लिए असम्भव था
ऐसी अनेक गंधर्व पत्नियों को
धरती पर खोजना
जो मोहिनी बन नाश कर दें शत्रुओं का!
पर उन्हें शत्रुमर्दन के लिए
आवश्यकता थी किसी ऐसे ही विकल्प की!

विश्वास करें
चाणक्य नहीं हो सकते थे किसी पुत्री के पिता
अन्यथा क्यों यातनामय विषपान कराते
सुंदर कन्याओं को
विषकन्या बनाने के लिए!

इतिहास मौन है इस प्रक्रिया पर
जिसमें कितनी ही बालिकाएं मर गई होंगी
विषकन्याएं बनने से पूर्व
क्या हिसाब रखा होगा मौर्य साम्राज्य ने
या राजा चंद्रगुप्त ने
कि कितनी ही कत्ल कर दी गई होंगी
ज़रा-सा संदेह होने पर
बस कहानियाँ लिख दी गई
शुकसप्तति में उन चरित्र हीन औरतों की
जिन्हें आज भी चटकारे लेकर पढा जाता है!

क्या विडम्बना है
ब्रह्मास्त्र कलयुग में आते आते
बदल गया एक स्त्री के शरीर में
जिन्हें डर नहीं लगता था
तीरों और तलवारों से
वे मेरे साथ भोग कर
चले जाते थे स्वर्गद्वार
आश्चर्य है आज भी
सबसे विनाशकारी बारूद ही
भरा है स्त्री देह में!

आचार्य कौटिल्य
स्त्री के शरीर में विष भरते हुए
क्यों नहीं सोचा तुमने
एक पुरुष के क्षुद्र स्वार्थ के लिए
किसी दूसरे पुरुष की वासना को बेध कर
तुम नहीं बदल पाओगे स्त्री की प्रकृति
जन्म नहीं लेतीं विषकन्याएं
उन्हें तुम बनाते हो!

Rajeshwar Vashishth

एक सवाल का बिना उत्तेजित हुए
उत्तर दो आचार्य
स्त्रियाँ तो आज भी अमृत बाँट कर
जीवन वार देती हैं समाज पर
क्या पुरुष की प्रकृति में
विधाता ने विष भरा था?

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