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अब तक आपने आईने से धूल साफ क्यों नहीं की है?

Apoorva Pratap Singh

मैंने उनको बचपन से देखा । उनकी और मेरी उम्र में बड़ा फासला होते हुए भी उन्होंने उनके दिल में आई हर बात पहले मुझे बताई ।
जब वो नवी में थी तब से उनको शादी करनी थी, फिर बारहवी करते हुए भी उनको शादी करनी थी । जिन जिन से उनकी बात चल सकती थी उनके बारे में भी बताती थी मुझे ।
मैंने उनको तब भी देखा जब जून की दोपहर में लहंगा पहन के घूंघट मार के वो और उनकी सहेली एक दूसरे की फोटो खींचते ।

उनके घर में लड़का लड़की कोई भेद नहीं था । वो, वो सब करती थी जो उनका जी चाहता, मेकअप- शॉपिंग । घर वालों के समझाने के बावजूद उनसे पढाई नही होती ।

कभी उनके पिता जी ने खुद चल के आये रिश्ते को नकार दिया था तो वो झगड़ा कर बैठी और बहुत रोई थी । पिता ने एक बडे कोर्स जिसमें एडमिशन ही लाखों में होता है, जॉइन करवाया तो उसमें दन्न से पहले सेमेस्टर में फेल हो गईं ।

वो अपनी शादी में कैसा फर्नीचर लेंगी, कौन सी गाड़ी लेंगी सब खुद उन्होंने लड़का तय होने से पहले से सोचा हुआ था ।
उनके पास सारा प्लान था कि कैसे उनकी हजारों की पचिया को सास को न देना पड़े और कैसे वो पचिया को सस्ती साड़ी से रीप्लेस कर सास को देंगी ।

मतलब यह कि वो हर तरीके से प्रवीणा-सुशीला थीं । 22 की होते होते उन्होंने आखिरकार शादी कर ली । हनीमून गईं, सास को नाक चने चबवा दिए, ऐसी कम ही जगह हैं जहां उन्होंने पति के ऊपर सवार होकर भ्रमण नहीं किया । बच्चे हो गए । 4-5 जन्मदिन मन गए ।

पिछले साल से अचानक उन्होंने फिर रोना शुरू कर दिया, मायके आके । उनके अनुसार, उन्होंने जीवन में अपने पेरेंट्स और समाज की वजह से कुछ नहीं कर पाया । घर वालों ने उन्हें ‘गाइड’ नहीं किया । उनकी सम्भावनाओं को तिलांजलि दे दी ! तब से उनका बाजा चालू है । उनके पेरेंट्स उनका फोन आता देख घबरा जाते हैं ।

सबसे बड़ा काम होता है खुद के निर्णयों की जिम्मेदारी लेना।

लड़कियां ही नहीं लड़के भी आपके जितने ही नालायक होते हैं पर बस वो लड़के होते हैं तो उनको यह शादी कर के दूसरे की कमाई खर्च करने और उन्ही पर ठीकरा फोड़ने की सहूलियत नही मिलती, इस कारण उनको कुछ भी छोटा मोटा करना पड़ जाता है ।

आपको ऐसी सहूलियत प्राप्त है इसलिए आप अपने कीमती साल बिना सोचे, आत्मावलोकन किये गुजार देती हैं फिर अचानक से किसी दिन होश आता है और आगे की और आशावान न हो के पीछे अटकी रहती हैं ।

आपको अटकना है अटकते रहो पर दूसरों को क्यों कोसना !!
बीती ताहि बिसारि दे , आगे की सुधि ले

वैसे प्रश्न यह भी है कि अब तक आपने आईने से धूल साफ क्यों नहीं की है ?

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