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गोकुल सामाजिक विश्वविद्यालय की गोकुल-सेना का जनांदोलन व बिहार झारखंड राज्यों के सात जिलों के हजारों गांवों के कई लाख एकड़ असिंचित कृषिभूमि के लिए 43 वर्षों से अधूरी पड़ी सिचाई व जलविद्युत परियोजना

Vivek “Samajik Yayavar”
Founder and Vice Chancellor,
Gokul Social University

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फोटो के लिए दी गई लिंक्स पर जाइए

जंतरमंतर, दिल्ली व कैबिनेट मंत्रियों से संबंधित फोटो
स्थानीय अभियानों व यात्राओं की फोटो पुलिस व जेल भरो अभियान संबंधित फोटो
 
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1974 के बिहार व आज के बिहार व झारखंड राज्यों के मुख्यतः सात जिलों के हजारों गांवों में असिंचित होने के कारण बंजर पड़ी कृषिभूमि को सिंचित करके हजारों किसान परिवारों को आर्थिक रूप से समृद्ध करने के लिए झारखंड से निकली उत्तर कोयल नदी सिचाई परियोजना का जन्म हुआ था।

लगभग 43 वर्ष पहले शुरु हुई सिचाई परियोजना का काम सैकड़ों करोड़ रुपए खर्च हो चुकने के बावजूद लगभग 28 वर्षों से बंद पड़ा रहा। हजारों गांवों के लाखों लोगों ने इस परियोजना के पूरा होना पर जितना विकास करना था वह तो हुआ ही नहीं उल्टे पीछे चलते चले गए। गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब व दिल्ली जैसे राज्यों में पीढ़ी दर पीढ़ी मजदूरी करने, शोषण कराने व अपमान झेलने के लिए अभिशप्त हो गए।

समय के साथ आम किसान परिवारों के बीच बढ़ते जनाधार व विश्वास से उत्साहित होकर गोकुल सामाजिक विश्वविद्यालय के जनांदोलन संगठन गोकुल-सेना ने कुछ वर्ष पूर्व इस सिचाई परियोजना को पूरा कराने की सामाजिक प्रतिबद्धता स्वीकार किया।

जनांदोलन की विजय

स्थानिय़ स्तर से लेकर देश की राजधानी तक धरना, प्रदर्शन, घेराव, यात्राओं, जेल भरो अभियान व न्यायलय में रिट दायर करने जैसे संघर्ष के विभिन्न तौर तरीकों से गोकुल-सेना ने भारत सरकार को विवश कर दिया कि 43 वर्षों से अपूर्ण पड़ी उत्तर कोयल सिचाईं परियोजना को पूरा किया जाए।

अभी कुछ दिनों पहले, यूं कहें कि पिछले सप्ताह ही भारत सरकार ने उत्तर कोयल सिचाई परियोजना को पूरा करने के लिए 1194 करोड़ रुपए देने की घोषणा की है।


Bihar North Koel Kutaku Dam - Campaigns

जनसंपर्क अभियान व प्रदर्शन (26 फोटो)

Bihar North Koel Kutaku Dam - Police and Jail

जेल भरो अभियान व पुलिस-सुरक्षा (14 फोटो)

Bihar North Koel Kutaku Dam - Protests in Delhi

दिल्ली में प्रदर्शन (7 फोटो)


उत्तर कोयल नदी सिचाई व कुटकू डैम परियोजना – परिचय

यह नदी 250 किलोमीटर से अधिक लंबी नदी है तथा सोन नदी में जाकर विलीन होती है। झारखंड राज्य की प्रमुख नदियों में से है। 1974 में शुरू हुई इस सिचाई परियोजना का प्रमुख उद्देश्य बिहार व झारखंड राज्यों के पलामू, लातेहर, गढ़वा, गया, औरंगाबाद, जहानाबाद व अरवल जिलों के हजारों गांवों के 300,000 (तीन लाख) एकड़ से अधिक असिंचित होने के कारण बंजर पड़ी कृषि भूमि को सिंचित किया जाना था।

चूंकि इस परियोजना में कुटकू में लगभग 65 मीटर ऊंचाई का डैम भी बनना था, डैम का पानी सिंचाई के लिए मोहम्मदगंज बैराज व इंद्रापुरी बैराज में प्रयोग किया जाना था, सहयोगी नहरें बननी थीं। इसलिए संसाधनों के अतिरिक्त उपयोग के लिए 24 मेगावाट की जल-विद्युत परियोजना भी थी।

1974 में शुरू हुई परियोजना का 1989 तक धीरे-धीरे होता हुआ तीन चौथाई से अधिक काम पूरा हुआ और रुक गया। लगभग 67 मीटर ऊंचा व 270 मीटर से अधिक लंबा डैम बनकर तैयार हो चुका था। बिजली बनाने के लिए टरबाइनें आ चुकी थीं। डैम में गेट लगने शेष थे। डूबने वाले गांवों के अधिकतर परिवारों को क्षतिपूर्ति दी जा चुकी थी। एक इंजीनियर की हत्या होने के चलते सैकड़ों करोड़ रुपए खर्च हो चुकने के बावजूद इस परियोजना का काम पूरा होने के पहले रुक गया, फिर रुका ही रहा।

1974 में शुरू हुई परियोजना 42 वर्षों तक भी आधी अधूरी रुकी रही। 1989 तक जितना काम हुआ था, वह भी खंडहर जैसा हो गया।

संघर्ष यात्रा

2014 में बिहार के गया जिले में चुनाव सभा में तत्कालीन मुख्यमंत्री गुजरात सरकार व वर्तमान प्रधानमंत्री भारत सरकार नरेंद्र मोदी जी ने वादा किया कि यदि वे भारत के प्रधानमंत्री बनते हैं तो उत्तर कोयल सिचाई परियोजना पूरा कराना उनकी प्रथम प्राथमिकताओं में से होगी।

हजारों गांवों के लोग आशान्वित थे कि मोदी जी अपने वायदे को पूरा करेंगे। लेकिन सरकार बनने के बाद मोदी जी समाज के लोगों के सामने किए गए इस वायदे को भूल गए।

गोकुल सेना ने स्थानीय स्तर से लेकर देश की राजधानी तक धरना, प्रदर्शन, घेराव, यात्राओं, जेल भरो अभियान व न्यायलय में रिट दायर करने रूपी विभिन्न तौर तरीकों से एक साथ संघर्ष शुरू किया ताकि देश के प्रधानमंत्री व केंद्र सरकार को समाज के लोगों से किया गया वादा याद दिलाया जा सके व वादा पूरा करवाया जा सके।

विभिन्न स्तरों पर हो रहे जनांदोलनों के दबाव व न्यायालय में दायर की गई रिट के कारण बिहार व झारखंड राज्यों के संबंधित विभागों के प्रमुख मंत्रियों को न्यायालय आकर जवाब देने को विवश होना पड़ा।

देश की राजधानी दिल्ली में जलसंसाधन विकास मंत्री, पर्यावरण मंत्री इत्यादि कैबिनेट मंत्रियों से चर्चा। जंतर मंतर पर धरना व घेराव। प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी जी की बिहार में जनसभा में विरोध प्रदर्शन इत्यादि तरीके भी आम आदमी की आवाज सरकार के कानों तक पहुंचाने के लिए आजमाए गए।

Prakash Javadekar,
Cabinet Minister, GoI.

Uma Bharti
Cabinet Minister, Government of India


अखबारों की कटिंग्स

Bihar North Koyal Kutaku Dam - Newspapers Hindi

(29 फोटो)

About the author

सामाजिक यायावर

The Founder and the Chief Editor, the Ground Report India group. The Vice-Chancellor and founder, the Gokul Social University, a non-formal but the community-university. The Author of मानसिक, सामाजिक, आर्थिक स्वराज्य की ओर, this book is based on various social issues, development community practices, water, agriculture, his groundworks & efforts and conditioning of thoughts & mind. Reviewers say it is a practical book which answers “What” “Why” “How” practically for the development and social solution in India. He is an Indian citizen & permanent resident of Australia and a scholar, an author, a social-policy critic, a frequent social wayfarer, a social entrepreneur and a journalist. He has been exploring, understanding and implementing the ideas of social-economy, participatory local governance, education, citizen-media, ground-journalism, rural-journalism, freedom of expression, bureaucratic accountability, tribal development, village development, reliefs & rehabilitation, village revival and other. For Ground Report India editions, Vivek had been organising national or semi-national tours for exploring ground realities covering 5000 to 15000 kilometres in one or two months to establish Ground Report India, a constructive ground journalism platform with social accountability. Vivek U Glendenning "सामाजिक यायावर"​ MCIJ

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