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अनंत नाग में अमरनाथ तीर्थ यात्रा में आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा की जानी चाहिए

Vidya Bhushan Rawat

अनंत नाग में अमरनाथ तीर्थ यात्रा में आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा की जानी चाहिए. ये भी हकीकत है के ऐसे हमले सीमा पार की शह के बिना पे नहीं हो सकते हैं लेकिन भारत सरकार की कश्मीर निति पूर्णतः असफल हो चुकी है. हम जानते है के इस वक़्त भक्त पत्रकार मामले को सांप्रदायिक रूप देने में व्यस्त होंगे और कई ने ट्वीट करना शुरू किया है के क्या #नोटइनमायनेम का कोई प्रदर्शन भी होगा . ये शर्मनाक है क्योंकि देश पर किसी भी संकट पर हम सभी लोग साथ होते हैं लेकिन अगर उस संकट का संप्रदायी करण करने की कोशिश होगी तो स्थिती बेहद गंभीर होगी .

हम जानते है के आतंक की इस वारदात का देश के सभी लोग चाहे हिन्दू हो या मुसलमान, दलित हो या आदिवासी या अन्य कोई कड़े शब्दों में निंदा करते है . हम लोग आतंक के खिलाफ है लेकिन हर किस्म के . उस आतंक के भी जो गौरक्षा के नाम पर निरपराध लोगो को मार रहा है . आखिर आतंक की किसी भी घटना में मारने वाले लोग तो निरपराध ही होते हैं .

हम जानते हैं के कश्मीर में भारत के जवान लड़ रहे है और अपने जान की क़ुरबानी भी दे रहे हैं . सवाल यह नहीं के फौज या जवान कार्य नहीं कर रहे . सवाल इस बात का है के इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स के बावजूद ऐसी घटना घटती है तो किसे दोष दे. आतंकवादी तो चाहते हैं के निरपराध लोगो को मारकर कश्मीर और देश में अफरा तफरी का माहौल पैदा कर दे. लोगो को एक दुसरे के खिलाफ खड़ा कर दे. कश्मीर में भाजपा की गठबंधन सरकार है और इसके नेताओं ने अपनी पूरी मर्जी कश्मीर पर चलाई है. न केवल सरकार ने अपितु टी वी पर भडुआ भोम्पुओ की फौज भी माहौल को साम्प्रदायिक बनाने में जुटी है लेकिन सवाल इस बात का है के कश्मीर में जो राजनैतिक पहल होनी चाहिए थी वो क्यों नहीं हो रही . क्यों ये सरकार हर एक मसले का हल सेना के जरिये चाहती है. अगर सेना हल होती तो हर देश में समस्याओ का समाधान सेना के जरिये हो जाता. सेना देश की सुरक्षा के लिए है और सैनिक उसके लिए अपनी जान भी लगा देता है . आज सिक्किम में भी भारतीय जवान अपनी जान पे खेलकर हमारी सीमा को सुरक्षित कर रहे है लेकिन सवाल यह है के बात कब होगी . क्या युद्ध किसी बात का समाधान है ?

हम राजनैतिक दलों और सरकार से अनुरोध करते हैं के कश्मीर के प्रश्न को गंभीरता से ले और उस पर सर्वदलीय बैठकर बुलाकर एक विशेष कमिटी का गठन करे . आतंकवादियों से कोई बात नहीं होनी चाहिए लेकिन कश्मीर के अन्दर जो लोग राजनैतिक समाधान चाहते हैं उनके साथ तो बात हो सकती है .

सरकार का काम होना चाहिए के सभी से अनुरोध करे के जहाँ इस घटना पर उसे दुःख होना चाहिए और इस कृत्य को करने वाले लोगो के खिलाफ कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए वही अपने चाहने वालो को देश के दुसरे हिस्से में आग उगलने और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की कोशिश से बचना चाहिए. अपने चुनाव जीतने के चक्कर में देश को विभाजित न करे . घटना की कड़े शब्दों में निंदा होनी चाहिए लेकिन सरकार की कश्मीर निति पर सवाल भी पूछे जाने चाहिए .

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