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हत्यारा किसान, दयालु चोर और क्रांतिकारी शासक!

Tribhuvan

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चंपूद्वीप के गर्तखंड में एक किसान के खेत में कुछ लोग घुस आए। वे गन्ने तोड़ने लगे। सरसों उजाड़ने लगे और गाजरें नष्ट करने लगे। किसान ने ऐतराज किया तो वे नहीं माने। किसान ने आव देखा न ताव, हल्ला मचाना शुरू कर दिया। मारो-मारो-चोरों को मारो।

किसान की आवाज़ सुनकर आसपास के किसान भाग-भागकर आने लगे। वे भी शोर मचाने लगे : चोर-चोर।

चोर डरकर भागने लगे। खेत में काम कर रहे एक मजदूर ने एक भागते चोर को पकड़ने की कोशिश की। चोर ने मजदूर को गोली मार दी। मजदूर मर गया। पूरे इलाके में हल्ला हो गया।

घटना होते ही पुलिस आई। दो-चार दिन जांच की और आख़िर किसान को असली हत्यारा बताकर पकड़ ले गई। पूरी फ़र्द तैयार की और किसान जांच रिपोर्ट में हत्यारे को उकसाने के आरोप का दोषी पाया गया; क्योंकि किसान के “चोर-चोर! भागो चोर-चोर!!! मारो चोरों को!!!” बोलने के बाद ही चोर ने मजदूर को मारा था और चालाक चोरों ने हल्ला मचाते किसान के विडियो अपने मोबाइल फ़ोन में बना लिए थे।

अंतत: किसान हत्या का दोषी ठहराया गया और उसे चालानी गार्ड जेल ले जाने लगे तो वहां एक और ही दृश्य था, जिसने किसान की आंखों में पानी ला दिया।

पुलिस, प्रशासन, विधायिका, कार्यपालिका आदि आदि ने देखा कि सारे चोर जार-जार रोए जा रहे थे। किसान इन रोते हुए चोरों को एकटक देख रहा था और हैरान हो रहा था।

पुलिस, प्रशासन, विधायिका, कार्यपालिका आदि के प्रतिनिधियों ने चोरों के प्रति सहानुभूति जताई और पूछा : अरे, तुमने हत्या की और फिर भी तुम्हें साफ बचा लिया। अब क्यों रोए जा रहे हो? मीडिया तुम्हारी तारीफें लिख रहा है, किसान की आलोचना कर रहा है, अदालत ने तुम्हारे बारे में कुछ पूछा ही नहीं, क्योंकि पुलिस की फर्द में तुम्हारे बारे में जो कुछ था, सब हटा दिया गया था। यहां तक कि किसान को किसान ही नहीं माना गया क्योंकि जमीन उसके नाम ही नहीं चढ़ी थी, वह तो पुराने जमींदार के ही नाम कागजों में बोल रही थी। किसान ने जींस पहन रखी थी और उसने एक चश्मा लगा रखा था, जिसे हमने रेबेन का साबित कर दिया था। उसके यहां रोजड़ों को भगाने के लिए सूतली बम रखे थे, पुलिस के आईओ ने सूतली शब्द हटाकर उसे बम कर दिया था और किसान सिर्फ़ हत्या ही नहीं, देशद्रोह के आरोप में भी जेल में है। पूरी सरकार तुम्हारे साथ है। अब क्यों रो रहे हो?

सारे चोर और ज़ाेर-ज़ोर से रोने लगे और एक साथ बोले : आप जैसे न्यायकारी, दयालु, राष्ट्रभक्त, परोपकारी, सहिष्णुकारी और मानवतावादी पुलिस अफसर, मींडियाकर्मी, न्यायाधीश और प्रशासनिक अधिकारी नहीं रहेंगे तो इस देश का क्या होगा!

सारे चोर और ज़ोर-ज़ोर से रोने लगे। किसान प्रसन्न था कि इस देश का भविष्य स्वर्णिम है; भले न्यायपालिका, कार्यपालिका, विधायिका और मीडिया से करुणा और न्याय नदारद हो जाएं, कम से कम वह कुछ आंसुओं के रूप में चोरों के हृदय में तो अक्षुण्ण है!

Credits: Tribhuvan’s Facebook Wall

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