क्या हम मुसलमान हैं ??

Saleem Sabri

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आधे-अधूरे पांच फर्ज़ (कलमा, नमाज़, रोज़ा, ज़कात, हज)पूरे कर हम मुसलमान होने का दावा करते है .. अधिकतर तो वो भी नहीं करते । लेकिन क्या हम अपने आचरण से मुसलमान है ?? शायद नहीं .. ?? लेकिन मुस्लिम के यहाँ जन्म लेने से या मुस्लिम नाम रख लेने भर से हम मुसलमान हो जाते और फिर इस्लाम जैसे महान धर्म के प्रतिनिधी भी अब पूरी दुनिया के लिए जैसा आचरण मुसलमान करते है वो ही इस्लाम है । —

लेकिन क्या हम इस्लाम के अनुसार आचरण कर रहे है ? क्या हमारे समाजिक जीवन में हमारा व्यवहार इस्लाम की शिक्षाओ के अनुरूप है .. ?? कुछ अपवादों को छोड़कर शायद 1-2% भी नहीं । आइए देखते है इस्लाम मुसलमानों से क्या तव्वको रखता है ।

इस्लाम के अनुसार मुसलमानो का व्यवहार :

  • अपने माँ-बाप के साथ अच्छा बर्ताव करो (कुरान,4.36)
  • अपने बच्चों को शिष्ट रहन-सहन और अच्छी शिक्षा प्रदान करो (पैगम्बर स० अ०)
  • सगे सम्बंधियों के साथ अच्छा बर्ताव करो (कुरान,4:36)
  • वह मुसलमान नहीं जिसका पेट भरा हो और पड़ोसी भूखा हो (पैगम्बर स० अ०)
  • पड़ोसी के घर से ऊंचा अपना घर न बनाओ ( पैगम्बर स० अ०)
  • गरीबों को खाना खिलाओ (कुरान )
  • मज़दूर को उसकी मज़दूरी उसका पसीना सूखने से पहले दे दो (पैगम्बर स० अ०)
  • अनाथों और निर्धनों के साथ दयालुता का व्यवहार करो (कुरान 4:36)
  • संसार की सभी रचनाओं पर दया करो (कुरान 21:107)
  • छायादार वृक्ष को न काटो (पैगम्बर स० अ०)
  • एक पौधा लगाना दान है (हदीस )
  • प्राकृतिक संसाधनों और धन की फिज़ूलखर्ची न करो (कुरान 7:31)
  • लोगों के मानवाधिकार का हनन माफ नहीं किया जाएगा (पैगम्बर स० अ०)
  • मुस्कुराकर मिलना भी दान है (पैगम्बर स० अ०)
  • अत्याचारी को अत्याचार से रोक दो (पैगम्बर स० अ०)
  • दयालु और विनर्म बनो (पैगम्बर स० अ०)
  • जब नापकर दो तो, नाप पूरी रखो । (कुरान 17:35)
  • जब बात कहो, तो इंसाफ की कहो , चाहे मामला नातेदार का क्यों न हो (कुरान 6:152)
  • अमानत में खयानत न करो (कुरान 4:58)
  • लोगों से भली बात करो (कुरान 2:83)
  • दूसरों की कमियों को उजागर न करो (पैगम्बर स० अ०)
  • सफाई आधा ईमान है (पैगम्बर स० अ०)
  • कमज़ोरो के मित्र बनो और ज़ालिम शासकों और उनके तरीकों का विरोध करो (कुरान 4:75)
  • गोद से कब्र तक ज्ञान प्राप्त करते रहो (पैगम्बर स० अ०)
  • अंहकार से बचो (कुरान 49:12)
  • झूठे पर अल्लाह की फटकार है (24:7)
  • अपनी गलती या गुनाह को किसी निर्दोष पर न थोपो (कुरान 4:112)
  • कंजूसी और जमाखोरी न करो (कुरान 3:180,9:34)
  • ब्याज लेना और देना अवैध है (कुरान 2:275,278-279)
  • मदिरा और जुआ शैतान के काम है (कुरान 5:90)
  • निर्धनता के भय से अपनी संतानों की हत्या (गर्भपात) न करो (कुरान 17:31)

और भी हज़ारों समाजिक व्यवहार और आचरण से सम्बन्धित शिक्षाएं है ,, लेकिन अफसोस सभी मुस्लिम तंजीमें और खुद हम भी फरायज़े से आगे सोचते ही नहीं है और दुनिया के सामने इस्लाम की बिगड़ी हुई छवि रख रहे है । हम गैर-मुस्लिमों की साज़िशों को तो ढूंढ लेते है , लेकिन कभी ईमानदारी से अपने अन्दर झांकते नहीं है । यादि हम 10% भी अमल कर ले तो शायद अपना और इस्लाम का कुछ भला कर पायें ।

अल्लाह हम सबको हिदायत दे और अमल करने की तौफीक दे। आमीन।

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