योगी आदित्यनाथ बनाम विपक्ष

Vivek “सामाजिक यायावर Social Wayfarer”

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अभी शपथ ग्रहण भी नहीं हुआ और आप हुआ-हुआ करने लगे। यदि हुआ-हुआ ही करना था तो भाजपा को इतने भारी बहुमत से जिताया क्यों। यदि आपको यह लगता है कि भारी बहुमत EVM की करामात है तो उतरिए सड़क पर और बचाइए लोकतंत्र को, खाइए लाठियां, जाइए जेल, करिए अपना सीना पुलिस की बंदूक से निकलने वाली गोली के सामने। फेसबुक व whatsapp से दुनिया नहीं चलती है। आप एक समय की रोटी नहीं कमा सकते फेसबुक व whatsapp में मैसेजों को कापी, फारवर्ड करके, और दुनिया बदलने का ख्वाब देखते हैं।

कुछ बातें बिलकुल चुस्ती के साथ गांठ में बांध कर समझ लीजिए।

या तो यह स्वीकारिए कि संघ व भाजपा के कार्यकर्ता जमीन से लेकर सोशल मीडिया में हर स्तर पर आपसे बेहतर हैं। वोट फेसबुक व whatsapp की लफ्फाजी से नहीं मिलता। वोट जमीन पर उतर कर अपने नेता के लिए मेहनत करने से मिलता है। वोट जब रोड-शो करने से नहीं मिलता तो फेसबुक व whatsapp में मैसेज फारवर्ड करने से कैसे मिल सकता है।

या यदि आप यह मानते हैं कि EVM के कारण भाजपा को बहुमत मिला, तो जैसा मैंने पोस्ट की शुरुआत में कहा कि उतरिए सड़कों पर, संघर्ष कीजिए। लफ्फाजी से बिलकुल भी काम नहीं चलेगा।

मैं जानता हूं कि आपमें बूता नहीं कि आप सड़क पर उतर कर संघर्ष कर पाएं। कभी जमीन पर उतर कर समाज के लिए काम व संघर्ष किया हो तो कुछ हिम्मत भी पड़े। आप में से जो अपवाद हैं उनकी बात नहीं कर रहा हूं।

आपको मेरी बात बुरी लगे या भली, यह आपकी अपनी सोच का स्तर। उत्तर प्रदेश में मायावती जी के दिन लद गए, मायावती जी के दिन लदने का मतलब बसपा के दिन लद गए। चैप्टर क्लोज। भावुक मत होइए, कड़वा सच है। EVM होती या न होती, मायावती जी की हालत कम-अधिक यही होती जो है।

अब बात आती है अखिलेश जी की। तो उनको वास्तविक जमीन पर उतरना पड़ेगा, एक आम जमीनी नेता की तरह। खुद को पूरी ताकत के साथ यादवों के अतिरिक्त अन्य पिछड़ी जातियों के मान्य व लोकप्रिय नेता के तौर पर स्थापित व साबित करना होगा। इसके अलावा कोई और विकल्प नहीं। यही परीक्षा है अखिलेश जी की, उनकी राजनैतिक सूझबूझ, सांगठनिक क्षमता व दूरदर्शिता की।

जितना मैं भाजपा व संघ को समझता हूं उसके आधार पर मैं योगी आदित्यनाथ जी को मोदी जी के बाद भाजपा के भावी प्रधानमंत्री के रूप में देख रहा हूं। मोदी जी शायद कुल दो टर्म तक प्रधानमंत्री रहेंगे, उसके बाद योगी आदित्यनाथ जी प्रधानमंत्री के रूप में पारी खेलेंगे।

मोदी जी ने गुजरात दंगों के लिए बदनाम हुए लेकिन पूरे देश में खुद को विकास पुरुष के रूप स्थापित कर लिया। योगी जी के खाते में गुजरात दंगों जैसा कुछ है भी नहीं। तब क्या योगी जी खुद को विकास पुरुष व शांत पुरुष के रूप में स्थापित नहीं कर पाएंगें। क्या मुश्किल है। योगी आदित्यनाथ जी के राजनैतिक पैतरों वाले बयानों में मिट्टी डालकर भूल जाइए।

केंद्र सरकार उनकी, राज्य में भारी बहुमत के साथ हैं। जितने मर्जी उतने राजमार्ग बनवा कर एयरोप्लेन उतरवा कर विकास पुरुष बन जाएंगें।  यदि एक प्रतिशत भी मान लीजिए कि योगी जी ने संतुलन के साथ काम किया तो कैसे रोक पाएंगें आप उनको। इस बार न रोक पाए तो अगली बार कैसे रोक लेंगें।

लोगों को लगा कि भाजपा अखिलेश जी से बेहतर काम करेगी, अवसर दिया। यदि योगी जी बेहतर काम करते हैं तो अखिलेश जी को और अधिक बेहतर कामों के विचारों के साथ लोगों को लुभाना पड़ेगा।

Yogi Adityanath, CM, Uttar Pradesh

मैं तो चाहता हूं कि योगी आदित्यनाथ जी अच्छा काम करें। ताकि उनके विपक्ष को और अधिक अच्छे कामों की मंशा के साथ आगे आना होना। यह एक बेहतर राजनीति की शुरुआत होगी।

काम करने की प्रतिस्पर्धा वाली राजनीति से डर किस बात का। यदि ऐसा हो पाया तो यह तो भारत की राजनीति में बहुत ही अधिक बेहतर शुरूआत होगी।

आप 2012 से मोदी का विरोध करते आ रहे हैं। क्या उखाड़ लिया। 2014 में भारी बहुमत से केंद्र में सरकार बनाई। आप और अधिक विरोध करने लगे। उन्होंने नोटबंदी लागू कर दी। आपको लगा कि रसगुल्ला आ गया मुंह में। आपने और अधिक विरोध किया।

आपका विरोध हवाई है। आप लोगों के बीच नहीं जाते। आप जमीन पर नहीं जाते हैं। आप तर्क गढ़ते हैं जमीन पर न जाने के। परिणाम देख लीजिए, आपने जितना विरोध किया मोदी जी उतने ही ताकतवर बनते गए।  उत्तर प्रदेश में भारी बहुमत से सरकार बनाने जा रहे हैं। लगभग पूरा देश उनका है।

जो आपने मोदी जी के साथ किया वही आप योगी आदित्यनाथ जी के साथ कर रहे हैं। वे अभी मुख्यमंत्री बने नहीं आपने उनका विरोध करना शुरू कर दिया। अवसर दीजिए, धैर्य रखिए एक साल तक उनको सत्ता को समझने बूझने दीजिए। फिर कुछ कहिए।

चलते-चलते :

यदि आप यह सोच कर चल रहे हैं कि आप सड़क पर नहीं उतरेंगें, संघर्ष नहीं करेंगे। तब भी सत्ता अपने आप रसगुल्ले की तरह आपके मुंह में आ गिरेगी तो आप शेखचिल्ली हैं।

यदि आप EVM को गलत मानते हैं तब भी, EVM को गलत नहीं मानते हैं तब भी। दोनों ही सूरत में आपको जमीन पर उतरना होगा और संघर्ष करना होगा। नए तौर तरीकों के साथ। सवाल यह है कि क्या आप ऐसा कर पाएंगें।

बैठे ठाले राजनीति करने व सत्ता पाने के दिन लद गए, बेहतर हो कि आप इस बात को जितनी जल्दी हो सके स्वीकार कर लें। आपको संघर्ष करना पड़ेगा, मेहनत करनी पड़ेगी। चाहे EVM हो या EVM  न हो।

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About the author

सामाजिक यायावर

The Founder and the Chief Editor, the Ground Report India group. The Vice-Chancellor and founder, the Gokul Social University, a non-formal but the community-university. The Author of मानसिक, सामाजिक, आर्थिक स्वराज्य की ओर, this book is based on various social issues, development community practices, water, agriculture, his groundworks & efforts and conditioning of thoughts & mind. Reviewers say it is a practical book which answers “What” “Why” “How” practically for the development and social solution in India. He is an Indian citizen & permanent resident of Australia and a scholar, an author, a social-policy critic, a frequent social wayfarer, a social entrepreneur and a journalist. He has been exploring, understanding and implementing the ideas of social-economy, participatory local governance, education, citizen-media, ground-journalism, rural-journalism, freedom of expression, bureaucratic accountability, tribal development, village development, reliefs & rehabilitation, village revival and other. For Ground Report India editions, Vivek had been organising national or semi-national tours for exploring ground realities covering 5000 to 15000 kilometres in one or two months to establish Ground Report India, a constructive ground journalism platform with social accountability. Vivek U Glendenning "सामाजिक यायावर"​ MCIJ

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