मेरी कितनी दुनियाएँ हैं

Rajneesh

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मेरी कितनी दुनियाएँ हैं
मैं कितनी ज़िंदगियाँ जीता हूँ एक साथ
और कितने किरदारों में ख़ुद को समेटने की कोशिश करता हूँ
मैं नहीं जानता
ठीक-ठीक तो नहीं जानता
या जानना नहीं चाहता
पर कुछ के बारे में निश्चित तौर पर बता सकता हूँ

कमरे के अन्दर और बाहर अलग हूँ मैं
और यह बात दुनिया के हर कमरे पर लागू होती है
सड़क के इस पार और उस पार अलग-अलग हूँ
दुनिया की हर सड़क पर…..
किसी के पास से गुज़रते हुए-
गुज़रने के पहले और गुजरने के बाद अलग अलग हूँ मैं

प्यार करते हुए-
प्यार किये जाने के पहले और प्यार किये जाने के बाद
तुमसे मिलने के पहले और तुमसे बिछड़ने के बाद
हारकर रोने से पहले और उसके बाद
हर रोज़ सोने से पहले और उठने के बाद
एक गीत सुनने के पहले और सुनने के बाद
पैदा होने के तुरंत बाद के तुरंत पहले और मरने के ऐन पहले के ऐन बाद
अलग-अलग हूँ मैं……
अलबत्ता मेरी समूची ज़िंदगी –
हर पहले और हर बाद के बीच फैली हुई है ….

तुम्हारी बेईमानियों वादाखिलाफियों और क्रूरताओं के बाद
मैं वो नहीं रहूँगा जो पहले था
तुम्हारी धूर्ततायें षड्यंत्र और अनंत शोषण कुछ न कुछ ज़रूर बदल देंगे मुझे
यह बदलाव तुम्हारे हक़ में नहीं होगा
तुम्हारी सनातन खून चूसने की लालसा जो भी योजनायें बनाएगी
जितने भी प्रपंच रचेगी जितनी भी यंत्रणाएं देगी
वो सब मेरे लोगों में कुछ न कुछ बदलाव लायेगा
और
निश्चय ही यह बदलाव तुम्हारे हक में नहीं होगा….

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