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अस्वीकरण (डिस्क्लेमर)

लेख में विचार लेखक के अपने विचार हैं। ग्राउंड रिपोर्ट इंडिया में प्रकाशित होने का तात्पर्य लेखक के विचारों से ग्राउंड रिपोर्ट इंडिया या संपादक या टीम आदि की सहमत होना नहीं हैं। - संपादकीय टीम

6 Comments

  1. Nishant
    February 19, 2017 @ 09:13

    वर्तमान में हत्याएं , बलात्कर, लोगों को डरा कर, शोषण करते हुए काल्पनिक भविष्य के लिए खुद भी नरकीय जीवन जीना और बाकी लोगों के जीवन को भी आसान न होने देना । उन लोगों के चेहरे भी पहचाने जाने चाहिए जो इन्हें बढ़ावा देते है , सिस्टम और इनके बीच दलाल का काम करते है आदिवासियों के नाम से ग्रांट उठा कर इन्हें फंडिंग पहुँचाते है, क्रांति के नाम पर स्थानीय लोगो से पैसा वसूलने का काम करते है । मतलब सत्ता बना भी ले तो क्या करेंगे रातों रात सब ठीक हो जायेगा या ठीक करने के क्रम में केवल माओवादी ही बचेंगे और जब केवल ये बचेंगे तो इनके अंदर की हिंसा , कुंठाएं एकाएक खत्म हो जाएँगी ।
    एक और मानवीय विडंबना से एक दम साफ़ साफ़ रुबरु कराने और जीवन को समझने में मदद करते रहने के लिए धन्यवाद
    सादर।

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  2. Ruman
    February 15, 2017 @ 19:10

    Acha wishleshan hai, kioki tarkik hai. Armed struggle zarurat padne per zaruri hota hai, lekin apni bat manwane ke leay hatiar uthana fasiwad hai, mauwadi fasiwad ka hi Ek chehra hai.

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  3. Wasim Meo
    February 15, 2017 @ 12:09

    इसको पढ़ कर आने वाली किताब को पढ़ने की इच्छा औऱ बढ़ गई । शुभकामनाएँ

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  4. महेश सिंह
    February 14, 2017 @ 13:34

    बहुत उम्दा विश्लेषण ☺ किताब के बारे में जिज्ञासा प्रबल हो गयी। माओवाद का इतन स्पष्ट विवेचन पहले नबी पढ़ा। कुछ पंक्तियाँ तो सुनहरे शब्दों में लिखे जाने लायक हैं । जैसे काल्पनिक भविष्य लिए वर्तमान को बलि ——–। बहुत शुभकामनायें ।।

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  5. आमिर
    February 13, 2017 @ 00:11

    सटीक एवं निष्पक्ष । इसको पढ़ कर आने वाली किताब को पढ़ने की इच्छा औऱ बढ़ गई । शुभकामनाएँ ।

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  6. Rohatas singh rana
    February 12, 2017 @ 18:22

    गूढ़ विषय का सटीक सामान्यीकरण ,समझ में आने वाली सीधी बातें , बहुत सटीक पकड़ है आपकी विषय पर,गहरे जड़ों तक पहुंचे हैं I इससे बेहतर क्या कहा जा सकता है कि “भविष्य अनिश्चित होता है। काल्पनिक भविष्य के लिए वर्तमान की बलि चढ़ाना प्रपंच, तर्क-छद्म व प्रवंचना से इतर कुछ भी नहीं।” नवीन साधना युक्त सृजन की बधाइयां i

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