मुलायम काका को अखिलेश भाई जी के संदर्भ में पत्र

सामाजिक यायावर


आदरणीय मुलायम काका,
सादर चरण स्पर्श।

जो उठापटक व घमासान चल रही है, बयानबाजी चल रही है, भावावेश चल रहा है व त्यागपत्र वाले पत्र, खून से लिखे पत्र आदि लिखे जा रहे हैं। मैंने सोचा कि मैं भी काका को पत्र लिख लूं, अवसर भी है अपनी बात कहने का। मेरा आपसे या अखिलेश भाई से स्वार्थ वाला कोई रिश्ता भी नहीं है, न ही मुझे चुनाव लड़ना है। मुझे आजतक आपकी पार्टी से या अखिलेश भाई की नेतृत्व वाली सरकार से, किसी प्रकार की कोई सुविधा ही प्राप्त हुई है और न ही मेरी आपसे या अखिलेश भाई से कभी व्यक्तिगत मुलाकात ही हुई है। इसलिए मेरा सोचना है कि मैं निष्पक्ष होकर अपनी बात कह सकता हूं। आशा है कि उदारमना आप मेरी धृष्टता को क्षमा करेंगें।

आपकी बात :

mulayam-singh-yadavइसमें कोई संदेह नहीं कि समाजवादी पार्टी सिर्फ और सिर्फ आपकी बनाई व बढ़ाई हुई है। आपने जिस जमाने में संघर्ष शुरू किया था, उस समय के जो हालात थे, आपने जिस तरह से अपनी जगह बनाई, पार्टी खड़ी की, सत्ता तक पहुंचे। आपके उस संघर्ष को समझ पाना, उस राजनैतिक चातुर्य की प्रशंसा कर पाना, आपकी दूरदर्शिता को देख पाने की क्षमता व दृष्टि आज के उन चाटुकार युवाओं में नहीं है जो अखिलेश भैया जिंदाबाद के नारे लगाते हुए अपनी वफादारी साबित करने का प्रयास करते हैं।

अखिलेश भाई का जयकारा लगाने वाले लोगों में अपवादों को छोड़कर अधिकतर लोग ऐसे हैं, जो अखिलेश भाई की मुख्यमंत्री बनने की संभावनाओं को देखते हुए साथ जुड़े, मुख्यमंत्री बनने पर सत्ता की मलाई खाने के लिए साथ जुड़े, जो अब जुड़ रहे हैं या वफादारी दिखा रहे हैं उनको यह लगता है कि अखिलेश भाई आज नहीं तो कल सत्ता में आएंगे।

इस प्रकार के लोगों से यह अपेक्षा करना कि वे आपकी सांगठनिक क्षमता को समझ पाएंगें या समर्पित कार्यकर्ताओं का क्या अर्थ होता है यह ही समझ पाएंगें।

लोग कुछ भी कहें, अखिलेश भाई को भी बुरा लग सकता है लेकिन मैं दो टूक कहना चाहता हूं कि अखिलेश भाई आपके कारण मुख्यमंत्री बने। यदि वे आपकी ही तरह एक सामान्य परिवेश के निकले सामान्य गुमनाम से युवा होते तो इतनी बड़ी पार्टी व मजबूत संगठन खड़ा करना उनके बूते की बात नहीं थी। लेकिन चाटुकार लोगों को इन सब तथ्यों की गहराई को समझने व स्वीकारने से कोई मतलब नहीं होता। उन्हें तो हल्ला गुल्ला करना होता है।

ये जो युवा आज अखिलेश जी के साथ खड़े दिख रहे हैं उनमें से अधिकतर का किसी विचारधारा, विकास या परिवर्तन से कोई मतलब नहीं, समझ ही नहीं जो कोई मतलब हो पड़ेगा। उनको सिर्फ इससे मतलब है कि आपके रहते आप अपने पुराने समर्पित व जांचे हुए सहयोगियों व कार्यकर्ताओं को ही महत्व देंगें, जिनके दम पर आपने इतनी बड़ी पार्टी खड़ी की और अखिलेश भाई को मुख्यमंत्री बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इनको तो अपनी संभावनाएं देखनीं हैं, अपने जुगाड़ देखने हैं।

अखिलेश भाई की बात :

akhilesh-singh-yadavमैं अखिलेश भाई का अवलोकन उस समय से कर रहा हूं जब उन्होंने राजनीति में प्रवेश लिया। निःसंदेह उन्होंने बहुत कुछ सीखा है, परिपक्वता की ओर बढ़े हैं। विनम्र हैं, शालीन हैं, संवेदनशील हैं, दूरदर्शी व इच्छाशक्ति रखते हैं। भारत की वर्तमान राजनैतिक परिदृश्य में ऐसे सुलझे हुए लोग बहुत नहीं है। यह आपकी ही रचनात्मकता है जो आपने ऐसा अपवाद नेता भारतीय राजनीति को उपलब्ध कराया।

अखिलेश भाई करते हुए सीखते हैं, तीव्रता से सीखते हैं, बिना अपने मूल्यों को बदलते हुए सीखते हैं। लोकतंत्र को समझते हैं। लोकतांत्रिक मूल्यों का उपहास करने की इच्छा नहीं रखते हैं। मेरा मानना है कि उनके ऐसा होने में आपकी परवरिश का योगदान है, इसलिए श्रेय आपको भी जाता है।

यदि शुरू के दो सालों को छोड़ दें जिनमें आपको प्रधानमंत्री पद के नजदीक जाते देखने के लिए हड़बड़ी में सरकार को चलाना रहा। लोगों ने क्या देखा मैं नहीं जानता लेकिन मुझे स्पष्ट दिख रहा था कि अखिलेश भाई आपको प्रधानमंत्री देखना चाहते थे। अच्छी सोच रखने के बावजूद लोकसभा चुनाव इतने नजदीक थे कि लोगों को लुभाने की पुरानी शैली को अपनाने के अलावे उनके पास पार्टी द्वारा स्वीकार्य विकल्प नहीं था। मामला अधकचरा रह गया। न पुरानी शैली ही पूरी तरह प्रयोग हो पाई और न ही नई शैली का आगाज हो पाया।

लोकसभा चुनावों के बाद अखिलेश भाई ने प्रयास करना शुरू किया कि वे अपनी सोच के हिसाब से काम कर पाएं। पहली बार इतनी कम उम्र का कोई युवा मुख्यमंत्री बना था, पहली बार इतना पढ़ा लिखा युवा मुख्यमंत्री बना था, बहुत लोगों को भ्रम भी रहा कि वे कठपुतली मुख्यमंत्री रहेंगें। ये भी कारण रहे कि उन्हें विरोध का सामना करना पड़ा।

पार्टी के अंदर, नौकरशाही आदि से सहयोग न मिलने के बावजूद अखिलेश भाई ने तुलनात्मक बेहतर तरीके से सरकार चलाई। अपराध वगैरह तो आकड़ों के मामले होते हैं। अन्यथा कुल मिलाकर अखिलेश भाई ने सरकार अच्छी चलाई। विरोधी भी उनकी आलोचना दावे से नहीं कर पाते हैं। केवल उत्तर प्रदेश में नहीं बल्कि भारत के विभिन्न क्षेत्रों में अखिलेश भाई की लोकप्रियता बढ़ी है।

मुझे लगता है कि अखिलेश भाई की यह इच्छा है कि उन्हें बिना अवांछनीय दबाव के अपने हिसाब से काम करने का अवसर मिले। ऐसी इच्छा रखना गलत भी नहीं क्योंकि युवा हैं, ऊर्जावान हैं, दृष्टि रखते हैं तथा काम करके स्वयं की क्षमता को साबित भी किया है।

भारत में दीर्घकालिक राजनीति अब विचारों की, परिवर्तन की व कार्यशैली की होनी है। अखिलेश भाई की कार्यशैली से यह अनुमान होता है कि वे ऐसी ही दीर्घकालिक राजनीति करने की इच्छा रखते हैं।

आप दोनों की बात :

akhilesh-mulayamअखिलेश भाई जो संवेदनशील हैं, विचारशील हैं, वे जरूर ही अंदर से आपके प्रति आभार व धन्यवाद ज्ञापन का भाव रखते होगें। उनके व आपके मध्य जो भी वैचारिक मतभेद है वह पीढ़ी का अंतर ही होगा।

मेरा आपसे निवेदन है कि आप अपने ऊपर विश्वास रखें। आपने अखिलेश भाई की बेहतरीन परवरिश की है। अखिलेश भाई को पाश्चात्य को भी समझने का अवसर मिला है। यदि वे बेहतर कार्यशैली से राजनीति करना चाहते हैं तो उनको करने दीजिए। इसमें आपका ही बड़प्पन है।

आज की जो राजनैतिक परिस्थिति है उसमें आप लोगों के आपस में मनभेदों से बहुत बड़ा नुकसान है। संभव है कि अखिलेश भाई उस क्षति से कभी उबर न पाएं। यदि सत्ता उनके हाथ में लंबे समय तक हाथ में न रही तो उनके चाटुकार लोग पाला बदलकर भाग जाएंगें।  आपको भी क्षति है क्योंकि लोकप्रियता अखिलेश भाई के साथ है, उत्तर प्रदेश के लोग उनको पसंद करते हैं, लोग अब पुरानी शैली की ओर नहीं जाना चाहते हैं।

मेरा निवेदन है कि आप लोग व्यवहारिकता को संज्ञान में रखते हुए, पिता-पुत्र वाले दंभ को दरकिनार करते हुए, चातुर्य व संतुलन के साथ मध्य का मार्ग निकालें। पिता-पुत्र के मध्य का दंभ सुलझाएं नहीं सुलझता है। सुलझता भी है तो सिर्फ पिता द्वारा पुत्र को स्वीकारने से। जीवन परिवर्तन व परिवर्तन को स्वीकारने का नाम है।

आप चाहें तो मेरे पत्र को बचकाना व अप्रयोगात्मक भी मान सकते हैं। उत्तर प्रदेश की वर्तमान राजनैतिक परिदृश्य में अखिलेश भाई से बेहतर राजनेता कोई दीखता नहीं, इसलिए उनका अपव्यय होते देखने की इच्छा नहीं है, जबकि मेरा उत्तर प्रदेश की राजनीति से कोई लेना देना नहीं, मैं तो मतदान भी नहीं करता हूं। इसीलिए आप तक अपनी बात पहुंचाने की धृष्टता कर रहा हूं।

सादर चरण स्पर्श।
आपका,
सामाजिक यायावर

पुनश्च – एक दो साल पहले मैंने अखिलेश भाई को भी पत्र लिखा था, कई लोगों ने कहा भी कि वे उन तक मेरा पत्र पहुंचा देंगें। पत्र उन तक पहुंचा नहीं पहुंचा, मुझे अनुमान नहीं। लेकिन मैंने पत्र में जो लिखा था, आज वही होते दिख रहा है। 

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About the author

सामाजिक यायावर

The Founder and the Chief Editor, the Ground Report India group. The Vice-Chancellor and founder, the Gokul Social University, a non-formal but the community-university. The Author of मानसिक, सामाजिक, आर्थिक स्वराज्य की ओर, this book is based on various social issues, development community practices, water, agriculture, his groundworks & efforts and conditioning of thoughts & mind. Reviewers say it is a practical book which answers “What” “Why” “How” practically for the development and social solution in India. He is an Indian citizen & permanent resident of Australia and a scholar, an author, a social-policy critic, a frequent social wayfarer, a social entrepreneur and a journalist. He has been exploring, understanding and implementing the ideas of social-economy, participatory local governance, education, citizen-media, ground-journalism, rural-journalism, freedom of expression, bureaucratic accountability, tribal development, village development, reliefs & rehabilitation, village revival and other. For Ground Report India editions, Vivek had been organising national or semi-national tours for exploring ground realities covering 5000 to 15000 kilometres in one or two months to establish Ground Report India, a constructive ground journalism platform with social accountability. Vivek U Glendenning "सामाजिक यायावर"​ MCIJ

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