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छोटे उद्योग व्यवसायों को स्वच्छ शासन व्यवस्था चाहिए नाकि रियायतें या सुरक्षा, कहतें हैं स्वर्ण भारत पार्टी के अध्यक्ष, संजय सोनवणी 

श्री सोनवणी, भारत की एकमात्र लिबरल पार्टी, स्वर्ण भारत पार्टी के अध्यक्ष ने चिंता व्यक्त की, कि भारत के छोटे उद्योग कारोबार शासन प्रणाली की गम्भीर दुष्क्रिया/अराजकता से ग्रसित है ।

भारत में जटिल नियामक व्यवस्था है जिसमें अधूरी और गैर विद्यमान इंफ्रास्ट्रक्चर व्यवस्था है। इंस्पेक्टर राज आज भी पूर्ण रूप से जीवित है और कार्य कर रहा है । हर स्तर पर भ्रस्टाचार विद्यमान है । बैंकों का राष्ट्रीयकरण समस्या का बड़ा हिस्सा हैं। जबकि राष्ट्रीय बैंकों में पूर्ण रूप से जवाबदेही का आभाव है तब भी ये बैंक छोटे उद्योगों को फण्ड के बजाय बड़ी कंपनियों को फण्ड करनें के लिए दौड़ लगातें हैं जिससे भ्रष्ट नेताओं के साथ मिलकर करदाता के फण्ड को निगल लिया जाता है । देश के करदाता के आज तक लगभग 5 लाख करोड़ अनर्जक परिसंपत्ति (नॉन परफार्मिंग एसेट्स) के नाम पर सरकारी बैंकों द्वारा डकार दिए गए हैं ।

कदम कदम पर नए कारोबार को शुरू करनें में और उसे चलानें में अड़चनें, विकट मुश्किलें खड़ी कर देती हैं । भारत आज भी दुनियां में उद्योग लगानें और व्यापार करनें में सबसे कठिन देशों में से एक है। "मेक इन इंडिया " जैसे नारों का कोई वजूद नहीं रह जाता यदि भारतीयों को भारत में उद्योग लगानें और व्यापार करनें में प्रतिबन्ध लगाया जाय। सभी सफल देशों में लघु उद्योग छेत्र ही विकास के इंजन होते हैं लेकिन दुर्भाग्य है कि भारत में इस छेत्र को बढनें ही नहीं दिया जाता है ।  जरूरत है भारतीय युवा के सशक्तिकरण करनें की, जिससे वह कारोबार को शुरू करके उसका विकास भी कर सके ।  लेकिन दुर्भाग्य है कि युवाओं को हर कदम पर रोका जा रहा है ।
 
सफल होनें के लिए उद्योगों को सरकार से बहुत कुछ नहीं चाहिए। सरकार से उन्हें केवल उतना ही चाहिए जोकि सरकार का दायित्व है जिसमें सुरक्षा और न्याय की व्यवस्था का भरोसा हो, और संपत्ति के अधिकारों की सुरक्षा का प्रावधान हो । इसके साथ ही सरकार जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदान करनें की सुविधा करे । साथ ही सरकार कीमत संकेतों को प्रशासित मूल्यों द्वारा नहीं बिगाड़े। ठीक इसी प्रकार वस्तुओं पर अधिकतम खुदरा मूल्य भी समाप्त हो जाना चाहिए । व्यापार को अपनी चीज़ की कीमत रखने का अधिकार भी होना चाहिए जिससे खुले बाजार में ये व्यवसाय स्वस्थ रूप से प्रतिस्पर्धा भी कर सकें।

लेकिन भारत में, सरकार अपनें मूलभूत जरूरी दायित्वों को पूरा नहीं करती । सच्चाई तो यह है कि सरकार छोटेव्यवसायों के साथ प्रतिस्पर्धा  करती है जैसे की सिगरेट और शराब को ड्यूटी फ्री दुकानों में बेचना और होटलों को चलानें का कारोबार करना । और शायद अपनी कमियों  को छुपानें के लिए एक विकृत रूप में , सरकार रियायतों और आरक्षण को छोटेव्यवसायों  के लिए बाटती है  । लेकिन रियायतें सचमुच में प्रोत्साहन को नष्ट करती हैं और भ्रष्टाचार को बढाती हैं। 

व्यवसाय की आज़ादी ही समृद्धि की चाबी है। श्री सोनवणी ने बताया कि जबतक भारत की शासन प्रणाली का पूर्ण रूप से सुधार नहीं हो जाता और जबतब भारत आज़ादी की नीतियों को अपनाता नहीं है तबतक भारत का विकास नहीं हो  सकता है श्री सोनवणी ने कहा कि स्वर्ण भारत पार्टी की नीतियाँ भारत के लिए अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की शासन प्रणाली का  सर्जन करती हैं जिससे सभी देशवासियों के लिए अभूतपूर्व समृद्धि हो सके ।

 छोटे व्यवसायों के सम्बन्ध में, स्वर्ण भारत पार्टी नौकरशाही की पूर्ण जवाबदेही को सुनिश्चित करेगी जिससे छोटे व्यवसायों को इंस्पेक्टरों की फ़ौज द्वारा परेशान नहीं किया जाए, लाल फीताशाही पर पूरी तरह नकेल कसी जाए , और कर्मचारियों को लेने और फायरिंग करने के अनुचित प्रतिबन्ध को हटाया जाए । इसके साथ ही हम ESIS नामांकन स्वैच्छिक बनायेगें और कर्मचारियों को निजी कंपनियों से स्वास्थ बिमा लेने की भी छूट होगी जबतक स्वर्ण भारत पार्टी की सामान्य स्वास्थ्य नीति प्रभाव में नहीं आती है ।

श्री सोनवणी ने छोटे व्यवसायों को स्वर्ण भारत पार्टी के मैनिफेस्टो की समीक्षा करनें और सुधार के लिए सुझावों को भी आमंत्रित किया ।

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