चाणक्य-नीति की चौपतियाएं

chanakya-01चाणक्य नीति की किताब पहली बार आज से तीस साल पहले मैंने तब देखी थी जब मैं छोटा था तथा अपने एक रिश्तेदार अभिभावक के साथ किसी गांव जा रहा था। बस बहुत ही खटारा थी बस के अंदर चालक सीट के पास निकले हुए बोनट पर बैठ कर एक आदमी अपने हाथ में पेन, पेंसिल व छोटी-छोटी चौपतियाएं लिए हुए उनको बेचने का प्रयास कर रहा था। उसी के बगल में एक अन्य आदमी खड़ा होकर कई प्रकार की शीशियां लिए हुए कई प्रकार के तेल बेच रहा था।
 
लगभग तीस साल पहले खटारा बस में बेची जा रही चाणक्य नीति की चौपतियाएं आज भी दूर-दराज के गावों में चलने वाली खटारा बसों से लेकर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के कनाट प्लेस के बड़े किताब दुकानदारों तक सहजता से उपलब्ध हैं।
 
मैं नहीं जानता कि इन चौपतियाओं को प्रकाशित करने वाले कौन हैं, उनका मकसद क्या है। वे चाणक्य का नाम भुना कर पैसा कमाने के अलावा सामाजिक रूप से कुछ जिम्मेदार महसूस करते भी हैं या नहीं। सच यही है कि मुझे उनके बारे में अंदाजा नहीं।
 
चाणक्य तो अब हैं नहीं, जिस जमाने में चाणक्य थे उस जमाने में कापी राइट जैसी कोई बात भी नहीं थी। न ही लिखे हुए वैसा का वैसा ही सुरक्षित रखे जाने की कोई ठोस व्यवस्था ही थी। इसलिए मुझे अंदाजा नहीं कि चाणक्य के नाम पर धड़ल्ले से छापी, बेंची व पढ़ी जाने वाली चाणक्य नीति की चौपतियाओं का ठोस आधार है भी या नहीं।
 
यदि मैं चाणक्य नीति के नाम पर छापी जानी वाली इन चौपतियाओं व पुस्तकों में लिखी सामग्री को चाणक्य का ही लिखा मान लूं, तो –
 
मुझे चाणक्य परले दर्जे के धूर्त, हिंसक, अमानवीय, प्रपंची, फरेबी, दंभी आदि किस्म के आदमी लगते हैं।
 
चाणक्य नीति का मतलब सिर्फ यह कि –
 
  • कितनी भी धूर्तता करके सत्ता प्राप्त करना चाहिए, सत्ता प्राप्त करके कितनी भी धूर्तता करके सत्ता पर बने रहने का प्रयास करना चाहिए।
  • किसी पर विश्वास नहीं करना चाहिए। जो विश्वास करे उसको प्रयोग करके उसको धोखा दे देना चाहिए।
  • प्रेम, विश्वास, त्याग आदि जैसे मूल्यों का कोई अर्थ नहीं।
  • सबकुछ सत्ता है, शक्ति है। किसी भी तरह इनको प्राप्त करना चाहिए और किसी भी तरह इनको भोगते रहना चाहिए।
  • इन्हीं सब धूर्तताओं, हिंसाओं, फरेबों, झूठों व तिकड़मों का नाम है चाणक्य-नीति।
 
मेरा मानना है कि चाणक्य भारत के उन लोगों में से है जिनके चरित्र का हनन सबसे अधिक किया गया है वह भी खुद उनके ही मूर्ख व स्वार्थी अनुगामियों द्वारा। जो मन में आया वह चाणक्य-नीति के नाम से कह दिया। जो चाणक्य के व्यक्तित्व का ककहरा भी नहीं जानते हैं वे भी चाणक्य के नाम से चाणक्य-नीति की दो-चार चौपतियाएं लिख दिए हैं, मानो चाणक्य से रोज जीवंत साक्षात्कार करते हों।
 
फेसबुक में भी हजारों फर्जी असली प्रोफाइल हर घंटे चाणक्य-नीति पर व्याख्यान देते थे। इसमें काफी रोक तब लगी जब कुछ लोगों ने चाणक्य-नीति का मजाक उड़ाने के लिए बिलकुल उलट बातें चाणक्य-नीति के नाम से छापनी शुरू कर दीं।
 
चाणक्य के बारे में जितना भी अध्ययन व समझ मेरी है उतने से अभी तक मैं इस बात पर पहुंचा हूं कि चाणक्य मौलिक चिंतक नहीं थे, चाणक्य सामाजिक चिंतक नहीं थे। उन्होंने चंद्रगुप्त को सत्ता प्राप्त करने में मदद की और इस प्रक्रिया में जिन तौर तरीकों का प्रयोग करके उन्होंने सफलता प्राप्त की उसको उन्होंने नीति के रूप में प्रतिष्ठित किया।
 
बहुत लोग चाहते हैं कि निरंकुश सत्ताएं भोगने को मिलें, इसलिए उनके लिए चाणक्य सबसे पसंदीदा व्यक्ति हुए। चाणक्य की बातों को तोड़ मरोड़ कर अपने अनुसार बनाते-बनाते इन लोगों ने चाणक्य-नीति को सड़कछाप व टटपुंजिया चौपतियों के स्तर तक पहुंचा दिया।
 
इससे कम से कम एक फायदा तो हुआ ही है कि जो भी धूर्त चरित्र का व्यक्ति है उसको चाणक्य का अनुगामी बनकर खुद को महान राजनैतिक व कूटनीतिक चिंतक मानने का दंभ जीने का अवसर तो मिल ही जाता है।
 
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About the author

सामाजिक यायावर

The Founder and the Chief Editor, the Ground Report India group. The Vice-Chancellor and founder, the Gokul Social University, a non-formal but the community-university. The Author of मानसिक, सामाजिक, आर्थिक स्वराज्य की ओर, this book is based on various social issues, development community practices, water, agriculture, his groundworks & efforts and conditioning of thoughts & mind. Reviewers say it is a practical book which answers “What” “Why” “How” practically for the development and social solution in India. He is an Indian citizen & permanent resident of Australia and a scholar, an author, a social-policy critic, a frequent social wayfarer, a social entrepreneur and a journalist. He has been exploring, understanding and implementing the ideas of social-economy, participatory local governance, education, citizen-media, ground-journalism, rural-journalism, freedom of expression, bureaucratic accountability, tribal development, village development, reliefs & rehabilitation, village revival and other. For Ground Report India editions, Vivek had been organising national or semi-national tours for exploring ground realities covering 5000 to 15000 kilometres in one or two months to establish Ground Report India, a constructive ground journalism platform with social accountability. Vivek U Glendenning "सामाजिक यायावर"​ MCIJ

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