एक सत्य कथा बनाम हमारी संस्कृति व संस्कार का एक नंगा पहलू

सामाजिक यायावर

एक युवा, भावुक व संवेदनशील| अपने माता, पिता, बहन, भाई व मित्रों को प्यार करने वाला| पढ़ने में बहुत अच्छा| B.Tech के बाद IIT बंबई से MBA किया हुआ| भारत में दुनिया की नामचीन कंपनियों में प्रबंधकीय पदों पर काम करना| अपने कलीग्स के साथ अच्छा व्यवहार करना| कुछ ऐसे चरित्र व व्यक्तित्व का युवा|

मैंने अपनी शादी एक आस्ट्रेलियन वैज्ञानिक महिला से किया जो प्रेम विवाह था| मेरी शादी पहले हुई और चूंकि विदेशी युवती से प्रेम विवाह हुआ, इसलिए मुझसे युवा ने पूछा कि वह शादी कैसे करे, मैने उससे कहा कि जिस व्यक्तित्व के आप हैं आपको प्रेम विवाह करना चाहिए| युवा ने मेरा सुझाव सुनते ही ठुकरा दिया|

युवा अपने माता पिता व परिवार की मर्जी से शादी करना चाहता था। मैने कहा कि भारतीय समाज में विवाह का मतलब जीवन सहचरत्व नहीं रहा है। जीवन साथी के चुनाव में पारस्परिक समझ, जीवन मूल्यों व पारिवारिक मूल्यों का कोई भी महत्व नहीं रहा है| कसौटियां बदल गई हैं| युवा को सामाजिक परंपराओं व संस्कारों के कर्मकांडों व पोथियों पर विश्वास था|

युवा के माता पिता ने खूब ठोंक बजाकर एक लड़की खोजी| लड़की उसी शहर की थी जिस शहर का युवा था| लड़की B.Tech थी और एक कंपनी में अच्छे वेतन पर नौकरी करती थी| दोनो का विवाह हुआ, मैं भी विवाह सपत्नीक गया और ठुमके भी लगाए| युवा के माता, पिता, बहन व भाई सभी बहुत खुश| युवा का छोटा भाई ऐसा कि अपने बड़े भाई व परिवार के लिए जान दे दे| छोटा भाई तो बेइंतहा खुश कि उसकी भाभी आ रही है|

युवा की शादी के कुछ महीने बाद ही पत्नी ने खटपट शुरू कर दी, पैसों के लिए, संपत्ति के लिए, बटवारे के लिए। युवा नहीं चाहता था तो युवा पर दबाव व शादी तोड़ने की अप्रत्यक्ष धमकियां। युवा दोनो तरफ मैनेज करना चाहता था, सौहार्दपूर्ण पारिवारिक जीवन जीना चाहता था। दोनो छुट्टियों में जब अपने शहर आते थे तो युवा को अपनी पत्नी के माता पिता के घर में ठहरना पड़ता था। यहां तक कि अपने माता पिता के घर जाने के लिए भी पत्नी से अनुमति लेनी पड़ती थी। जितनी देर के लिए युवा को अपने माता पिता के पास आने की अनुमति मिलती थी, उससे देरी होने पर पत्नी फोन खड़खडाना शुरू करती थी या युवा के माता पिता के घर झगड़ा करने पहुंच जाती थी।

दोनों जिस शहर में नौकरी करते थे वहां उनके घर में यदि युवा के माता पिता यदि चंद दिनों के लिए पहुंच जाएं तो पत्नी को बड़ी तकलीफ, माता पिता के सामने तो ऊपर से मुस्कुराए देखभाल करे लेकिन अकेले में युवा का जीना दूभर कर दे| धीरे धीरे मुस्कराते हुए देखभाल करने का ढोंग बंद करके सीधे अपमान करना शुरू। जबकि पत्नी के माता पिता, भाई, बहन महीनों आकर रहते थे तो पत्नी को कोई भी परेशानी नहीं होती थी|

कुछ समय बाद युवा की माता का देहावसान होता है| युवा पिता बनता है। युवा के छोटे भाई को अपनी भतीजी व भतीजे को छूने का अधिकार भी युवा की पत्नी नहीं देती है| जबकि छोटा भाई अपने भतीजी व भतीजा के साथ रिश्तों को जीना चाहता है आखिर वे उसके अपने बड़े भाई की संताने हैं| इन्हीं मानसिक व भावनात्मक तनावों से कई वर्षों तक गुजरते हुए युवा जीता रहा|

युवा व उसकी पत्नी छुट्टियों पर आए हुए थे|  युवा अपनी पत्नी, सास, ससुर आदि के साथ उनके किसी रिश्तेदार के यहां मिलने गांव जा रहे थे| लौटते समय रास्ते मे ही युवा मानसिक अवसाद में पहुंच जाता है| युवा की पत्नी, युवा के सास ससुर आदि युवा को वहीं अनजान सड़क पर छोड़कर शहर पहुंचते हैं। युवा के पिता व छोटे भाई को बताते हैं कि युवा पागल हो गया है तो उसको फलाने गांव के पास फलाने रास्ते पर छोड़ आए हैं|

युवा का छोटा भाई भी IIT से MBA, एक कंपनी के महत्वपूर्ण विभाग का मुखिया। फोन सुनते ही कार से कई सौ किलोमीटर की यात्रा करके अपने भाई के पास पहुंचता है। डाक्टरों से संपर्क करता है, डाक्टर कहते हैं कि युवा पागल नहीं हुआ है बस अवसाद से ग्रस्त है, भावनात्मक व मानसिक आराम व सकून चाहिए|

युवा के पिता व छोटा भाई युवा की देखभाल करते हैं और सामान्य अवस्था में पहुचाते हैं| इस पूरे समय में युवा की पत्नी व सास ससुर को युवा की कोई चिंता नहीं| जबकि युवा ने कुत्ते की तरह स्वामिभक्ति के साथ अपने सास ससुर को महीनों महीनों अपने घर में रखकर सेवा की, जबकि खुद अपने माता पिता की न की| युवा के ठीक होते ही पत्नी ने उसको नौकरी ज्वाइन करने के लिए बुला लिया|

युवा के पिता दारू पीते थे, अपने बेटे को अवसाद में देखकर दारू पीना एक झटके में छोड़ दिए। अपने बेटे के पास उसकी देखभाल करने के लिए उसके साथ रहने गए तो युवा की पत्नी उनसे पैसों का हिसाब किताब मांगती। हिसाब भी कैसा। युवा के माता पिता व रिश्तेदार जब जब मिलने आए तो रहने का किराया, भोजन का खर्चा आदि का आधा। युवा की पत्नी का कहना कि घर का खर्च दोनो के पैसे से चलता है तो उसको आधा खर्चा मिलना चाहिए।

युवा के पिता अपने बेटे के लिए बहू की बेहूदगियां झेलते रहे। वे अपनी पोती व पोते को बहुत प्रेम करते हैं। उनसे कहा गया वे अपने पोते व पोती को चूम नहीं सकते हैं, गोद में नहीं बैठा सकते हैं, लाड़ नहीं कर सकते हैं। तर्क दिया गया कि बच्चों की यदि लाड़ पाने की आदत पड़ गई तो बाहर वालों से भी लाड़ मागेंगे। युवा के पिता मजबूरन अपने बेटे का घर छोड़कर अपने शहर वापस आ गए।

लेटेस्ट अपडेट यह है कि युवा की पत्नी व पत्नी के माता पिता ने तलाक की बातचीत शुरू दी है। युवा अपनी पत्नी व बच्चों को प्रेम करता है, साथ जीना चाहता है। लेकिन पत्नी को तलाक चाहिए। पत्नी को अपने बच्चों के लिए संवेदनशील पिता नहीं चाहिए। पत्नी को तलाक चाहिए।

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ऐसी ढेरों घिनौनी और बदबूदार सच्ची गाथाओं से हमारा समाज भरा पड़ा है। लेकिन हम अपनी बदबू दूर करने की बजाए, यह साबित करने में लगे रहते हैं कि दूसरे भी बदबूदार हैं। शायद यही साबित करना ही हमारी संस्कृति है, यही हमारे संस्कार हैं, और हमें अपने ऐसे दोगलेपन पर गर्व होता है।

About the author

सामाजिक यायावर

The Founder and the Chief Editor, the Ground Report India group. The Vice-Chancellor and founder, the Gokul Social University, a non-formal but the community-university. The Author of मानसिक, सामाजिक, आर्थिक स्वराज्य की ओर, this book is based on various social issues, development community practices, water, agriculture, his groundworks & efforts and conditioning of thoughts & mind. Reviewers say it is a practical book which answers “What” “Why” “How” practically for the development and social solution in India. He is an Indian citizen & permanent resident of Australia and a scholar, an author, a social-policy critic, a frequent social wayfarer, a social entrepreneur and a journalist. He has been exploring, understanding and implementing the ideas of social-economy, participatory local governance, education, citizen-media, ground-journalism, rural-journalism, freedom of expression, bureaucratic accountability, tribal development, village development, reliefs & rehabilitation, village revival and other. For Ground Report India editions, Vivek had been organising national or semi-national tours for exploring ground realities covering 5000 to 15000 kilometres in one or two months to establish Ground Report India, a constructive ground journalism platform with social accountability. Vivek U Glendenning "सामाजिक यायावर"​ MCIJ

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